Textile Sector: सरकार का बड़ा दांव! टैक्स स्ट्रक्चर में होगा बदलाव, एक्सपोर्ट को मिलेगी रफ्तार

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Textile Sector: सरकार का बड़ा दांव! टैक्स स्ट्रक्चर में होगा बदलाव, एक्सपोर्ट को मिलेगी रफ्तार

केंद्र सरकार टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक नया इंटीग्रेटेड टैक्स फ्रेमवर्क तैयार कर रही है। इसका मकसद कच्चे माल और मशीनरी पर कस्टम ड्यूटी घटाकर भारतीय कंपनियों को ग्लोबल मार्केट में वियतनाम और बांग्लादेश जैसी बड़ी ताकतों से मुकाबला करने के लिए तैयार करना है।

कपड़ा मंत्रालय अब एक ऐसे यूनिफाइड टैक्स स्ट्रक्चर पर काम कर रहा है, जो फाइबर से लेकर तैयार कपड़ों तक पूरी सप्लाई चेन को कवर करेगा। इस बदलाव का मुख्य लक्ष्य भारतीय निर्माताओं को लॉन्ग-टर्म कॉस्ट स्टेबिलिटी देना है, ताकि वे ग्लोबल लेवल पर बेहतर प्लानिंग कर सकें।

फिलहाल भारतीय कंपनियों को इम्पोर्ट ड्यूटी के कारण काफी भारी लागत चुकानी पड़ती है, जिससे विदेशी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो जाता है। सरकार अब कैपरोलैक्टम, कॉटन और रेयॉन-ग्रेड वुड पल्प जैसी चीजों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को हटाने या सस्पेंड करने पर विचार कर रही है। साथ ही, विस्कोस रेयॉन फिलामेंट यार्न पर लगने वाली एंटी-डंपिंग ड्यूटी पर भी सरकार की नजर है, जो छोटे मैन्युफैक्चरर्स के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी।

इंडस्ट्री की मांग और सरकारी योजना

इंडस्ट्री के दिग्गज 6 महीने के लिए 5 प्रमुख पॉलिएस्टर-चेन प्रोडक्ट्स (जैसे PTA और MEG) पर ड्यूटी माफी की मांग कर रहे हैं। जुलाई में ये छूट हटने के बाद से कंपनियों की लागत में इजाफा हुआ है। यह टैक्स रिव्यू सरकार की ₹40,000 करोड़ की 'टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम' का हिस्सा है, जो सेक्टर को मॉडर्नाइज करने पर जोर दे रही है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में टेक्सटाइल सेक्टर की हिस्सेदारी कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स में करीब 9% है और यह 4.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। 2030 तक $350 बिलियन का वैल्युएशन हासिल करने के लिए सरकार अब सिर्फ इन्वेस्टमेंट ही नहीं, बल्कि ऑपरेशनल कॉस्ट कम करने पर भी फोकस कर रही है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि सरकार इन बदलावों को कब तक लागू करती है, क्योंकि कच्चा माल सस्ता होने से कंपनियों के मार्जिन में सीधे तौर पर सुधार देखने को मिल सकता है।

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