Indian Carpet Exports: टैरिफ डील का बूस्टर! गिरे एक्सपोर्ट्स को मिलेगी रफ्तार, अमेरिका में बढ़ेगी धाक?

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Carpet Exports: टैरिफ डील का बूस्टर! गिरे एक्सपोर्ट्स को मिलेगी रफ्तार, अमेरिका में बढ़ेगी धाक?
Overview

भारतीय कारपेट (Carpet) और रग (Rug) एक्सपोर्ट्स (Exports) को बड़ा झटका लगा है। अप्रैल से नवंबर के बीच निर्यात में करीब **9%** की गिरावट आई है, जो **735 मिलियन डॉलर** तक पहुंच गया है। इसकी मुख्य वजह अमेरिका को होने वाले शिपमेंट्स में भारी कमी है। हालांकि, नए इंडिया-US ट्रेड डील (Trade Deal) से इस सेक्टर को उम्मीद की किरण दिखी है।

एक्सपोर्ट्स में गिरावट और वजह

भारतीय कारपेट और रग सेक्टर के लिए पिछले कुछ महीने मुश्किल भरे रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष के पहले आठ महीनों में, यानी अप्रैल से नवंबर के बीच, निर्यात में लगभग 9% की बड़ी गिरावट देखी गई है, जिससे यह 735 मिलियन डॉलर पर आ गया है। यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका के बाज़ार में हुई है, जो भारतीय कारपेट एक्सपोर्ट्स का सबसे बड़ा ग्राहक रहा है। यह सेक्टर काफी लेबर-इंटेंसिव (labor-intensive) है, जिसमें लाखों कुशल कारीगर काम करते हैं। जहां यूनाइटेड किंगडम (UK) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों में एक्सपोर्ट्स में कुछ बढ़ोतरी हुई भी, वह अमेरिका से हुए भारी नुकसान की भरपाई नहीं कर पाई। आंकड़े बताते हैं कि सितंबर में निर्यात 32%, अक्टूबर में 22%, और नवंबर में 9% तक गिर गया था, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

तुर्की से मुकाबला और टैरिफ का गणित

भारतीय कारपेट एक्सपोर्टर्स को जो दिक्कतें आ रही थीं, उनमें टैरिफ (tariff) का बड़ा हाथ रहा है। भले ही दुनिया भर में कारपेट एक्सपोर्ट में चीन आगे हो, लेकिन भारत के लिए मुख्य मुकाबला तुर्की (Turkey) से रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि तुर्की को अमेरिकी बाज़ार में बड़ा टैरिफ एडवांटेज (tariff advantage) हासिल था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां तुर्की के कारपेट पर अमेरिका में टैरिफ केवल 15% था, वहीं भारतीय कारपेट पर यह 55% तक जा सकता था। इस बड़े अंतर के कारण भारतीय प्रोडक्ट्स की प्राइसिंग कॉम्पिटिटिवनेस (pricing competitiveness) पर असर पड़ा और ऑर्डर्स दूसरी तरफ जाने लगे। 2023 में तुर्की का कुल कारपेट एक्सपोर्ट 2.75 बिलियन डॉलर का था, जबकि भारत का FY24 में 1.39 बिलियन डॉलर और FY25 में 1.54 बिलियन डॉलर था। 2024 में अमेरिका ने करीब 1.59 बिलियन डॉलर के हैंड-वोवन (hand-woven) कारपेट इम्पोर्ट किए, जिनमें भारत का हिस्सा 468 मिलियन डॉलर था, जबकि तुर्की ने 743 मिलियन डॉलर का कारोबार किया।

ग्लोबल मार्केट और घरेलू फैक्टर

इन ट्रेड (trade) से जुड़ी दिक्कतों के अलावा, ग्लोबल मार्केट (global market) के रुझान भी इस सेक्टर पर असर डालते हैं। 2023 में ग्लोबल कारपेट और रग मार्केट का वैल्यूएशन लगभग 51.7 बिलियन डॉलर था, और अगले 10 सालों में इसके 7-8% की CAGR से बढ़ने की उम्मीद है। बढ़ती शहरीकरण, लोगों की डिस्पोजेबल इनकम (disposable income) में बढ़ोतरी और घर सजाने की मांग इसके मुख्य चालक हैं। यह सेक्टर 20 लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देता है, जिनमें ज़्यादातर ग्रामीण इलाकों से हैं, इसलिए यह ग्लोबल डिमांड और ट्रेड कंडीशंस (trade conditions) में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति काफी संवेदनशील है।

नई ट्रेड डील से उम्मीद की किरण

अब, इस सेक्टर के लिए एक बड़ा मोड़ आया है। हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट (trade agreement) के तहत, भारतीय प्रोडक्ट्स पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ (reciprocal tariffs) को घटाकर 18% कर दिया गया है। माना जा रहा है कि इससे भारतीय एक्सपोर्ट्स की खोई हुई प्राइसिंग एज (pricing edge) वापस मिलेगी और वे बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले ज़्यादा कॉम्पिटिटिव हो जाएंगे। विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ में इस कमी से भारतीय कारपेट्स तुर्की के सप्लायर्स से मार्केट शेयर वापस खींच सकते हैं और टेक्सटाइल (textile) व अन्य लेबर-इंटेंसिव एक्सपोर्ट सेक्टर्स में डिमांड को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, खरीदारों द्वारा नए सिरे से कॉन्ट्रैक्ट्स (contracts) पर बातचीत करने के कारण इसका पूरा असर दिखने में कुछ महीने लग सकते हैं। भारतीय कारपेट मार्केट में अच्छी ग्रोथ का अनुमान है, 2026 तक इसके 1.18 बिलियन डॉलर तक पहुंचने और 2031 तक 9.61% की CAGR से बढ़ने की उम्मीद है।

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