कपड़ा निर्यातकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने RoSCTL स्कीम को **31 दिसंबर 2026** तक बढ़ा दिया है। यह कदम वैश्विक बाजार में भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने और मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।
निर्यातकों को मिली पॉलिसी स्टेबिलिटी
कपड़ा मंत्रालय ने Rebate of State and Central Taxes and Levies (RoSCTL) स्कीम को उसके मौजूदा स्वरूप और दरों के साथ 31 दिसंबर 2026 तक जारी रखने का फैसला किया है। यह निर्णय उन हजारों निर्यातकों के लिए बेहद अहम है, जो ग्लोबल मार्केट में अपनी जगह बनाने के लिए सरकारी सपोर्ट पर निर्भर हैं।
क्यों जरूरी है यह स्कीम?
टेक्सटाइल कंपनियों जैसे Gokaldas Exports और SP Apparels के लिए यह स्कीम किसी लाइफलाइन से कम नहीं है। ये कंपनियां बहुत ही कम प्रॉफिट मार्जिन पर काम करती हैं। मैन्युफैक्चरिंग के दौरान होने वाले बिजली और ईंधन जैसे खर्च, जो GST रिफंड में कवर नहीं होते, उनकी भरपाई RoSCTL के जरिए होती है। 2025-26 फाइनेंशियल ईयर के दौरान 15,400 से ज्यादा निर्यातकों ने इस स्कीम का लाभ उठाया है।
सेक्टर के सामने चुनौतियां
सरकार के इस फैसले से पॉलिसी अनिश्चितता तो दूर हुई है, लेकिन सेक्टर की चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में मांग की स्थिति अभी भी संवेदनशील है। साथ ही, कॉटन की कीमतों में उतार-चढ़ाव कंपनियों के प्रोडक्शन कॉस्ट को प्रभावित कर रहे हैं। निवेशकों को अब इन कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर नजर रखनी चाहिए, जहां मार्जिन पर इस पॉलिसी एक्सटेंशन का सीधा असर दिखाई दे सकता है।
