Cotton Association of India: नए ट्रेड पैक्ट से ग्लोबल मार्केट पर नजर, टेक्सटाइल सेक्टर में आएगा बड़ा बदलाव

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Cotton Association of India: नए ट्रेड पैक्ट से ग्लोबल मार्केट पर नजर, टेक्सटाइल सेक्टर में आएगा बड़ा बदलाव

Cotton Association of India (CAI) नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) के जरिए भारतीय टेक्सटाइल की मांग बढ़ाने की तैयारी कर रही है। भारत दुनिया का **20%** फाइबर उत्पादन करता है और अब इंडस्ट्री निर्यात की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़े नीतिगत बदलावों पर जोर दे रही है।

भारत वैश्विक स्तर पर कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, जो दुनिया के कुल फाइबर उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा है। अब Cotton Association of India (CAI) हाल ही में हस्ताक्षरित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) का लाभ उठाकर घरेलू टेक्सटाइल सेक्टर को ग्लोबल मार्केट में और मजबूती देने की कोशिश कर रही है। हालांकि ट्रेड पैक्ट से टैरिफ बाधाएं कम होने की उम्मीद है, लेकिन जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक कामयाबी के लिए कपास की गुणवत्ता और उससे जुड़ी अशुद्धियों जैसी पुरानी समस्याओं को सुलझाना जरूरी है।

नीति और मूल्य निर्धारण में सुधार

हाल ही में संपन्न हुई 104वीं वार्षिक आम बैठक में, CAI नेतृत्व ने नीतिगत वकालत की ओर एक नया रुख अपनाया है। एसोसिएशन अब 'भावंतर' (Bhavantar) जैसी सपोर्ट प्रणाली की पैरवी कर रही है, जिसका लक्ष्य किसानों को मूल्य सुरक्षा प्रदान करना और मार्केट में लिक्विडिटी बनाए रखना है। साथ ही, इंडस्ट्री किसानों से सीधे कपास की खरीद पर 'रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म' (Reverse Charge Mechanism) को हटाने की मांग कर रही है, जो अब तक ट्रेडर्स और गिनर्स के लिए एक बड़ी बाधा बना हुआ है।

नए बेंचमार्क और वैश्विक सहयोग

कीमतों के डेटा को व्यवस्थित करने के लिए, CAI अपना 'इंडिया कॉटन इंडेक्स' (India Cotton Index) लॉन्च करने की योजना बना रही है। यह टूल एक राष्ट्रीय प्राइस बेंचमार्क के रूप में काम करेगा, जिससे खरीदारों और विक्रेताओं को सही फैसले लेने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, संस्था ने ब्राजील की ABRAPA के साथ एक साझेदारी की है ताकि सस्टेनेबिलिटी और प्रोडक्ट ट्रेसेबिलिटी को लेकर अनुभव साझा किए जा सकें।

निवेशकों के लिए संकेत

टेक्सटाइल सेक्टर के निवेशकों को इन बदलावों पर बारीक नजर रखनी चाहिए। यह सेक्टर कच्चे माल की लागत और ग्लोबल मांग के प्रति काफी संवेदनशील रहता है। अगर ये नीतिगत सुधार लागू होते हैं, तो कंपनियों के मार्जिन और ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी में सुधार हो सकता है, लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर मिलने वाली कड़ी टक्कर और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स बरकरार रखना कंपनियों के लिए अब भी बड़ी चुनौती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.