Birla Cotsyn Revival: NCLT की हरी झंडी, ₹52.43 करोड़ की स्कीम मंजूर, कंपनी फिर दौड़ेगी!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Birla Cotsyn Revival: NCLT की हरी झंडी, ₹52.43 करोड़ की स्कीम मंजूर, कंपनी फिर दौड़ेगी!
Overview

Birla Cotsyn (India) Limited के निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने कंपनी के रिवाइवल के लिए **₹52.43 करोड़** की कॉम्प्रिहेंसिव स्कीम ऑफ कॉम्प्रोमाइज एंड अरेंजमेंट को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही कंपनी कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) और लिक्विडेशन से बाहर निकल गई है, और अब एक गोइंग कंसर्न (going concern) के तौर पर काम करेगी।

NCLT ने खोला रिवाइवल का रास्ता

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने 9 जनवरी 2025 को Birla Cotsyn (India) Limited के लिए एक 'कॉम्प्रिहेंसिव स्कीम ऑफ कॉम्प्रोमाइज एंड अरेंजमेंट' को मंजूरी दी है। यह मंजूरी कंपनी को कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) और उसके बाद की लिक्विडेशन प्रक्रिया से औपचारिक रूप से बाहर निकालती है, जो नवंबर 2018 में CIRP और सितंबर 2019 में लिक्विडेशन के तहत शुरू हुई थी।

नए एक्वायरर्स की बड़ी छलांग

यह रिवाइवल स्कीम नए एक्वायरर्स - निखिल जैन, रोहस्टोफ इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और वेंड्ट फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड - की ओर से ₹52.43 करोड़ की वित्तीय प्रतिबद्धता के साथ आई है। यह रकम पिछली बार रिजेक्ट की गई ₹14 करोड़ की रेजोल्यूशन प्लान से कहीं ज्यादा है, जिससे स्टेकहोल्डर्स के लिए रिकवरी की संभावना बढ़ी है।

क्यों है यह फैसला अहम?

इस स्कीम की मंजूरी से Birla Cotsyn लिक्विडेशन की स्थिति से वापस एक गोइंग कंसर्न के तौर पर काम कर सकेगी। यह कंपनी के ऑपरेशन्स को फिर से शुरू करने, रोजगार पैदा करने और आर्थिक वैल्यू चेन में योगदान करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह क्रेडिटर्स के लिए एक सकारात्मक परिणाम है और भारतीय कॉर्पोरेट परिदृश्य में डिस्ट्रेस्ड एसेट्स के टर्नअराउंड की उम्मीद जगाता है।

कंपनी का पुराना सफर

Birla Cotsyn (India) Limited, जो लगभग 1941 में स्थापित हुई थी और यश बिड़ला ग्रुप का हिस्सा थी, कॉटन और सिंथेटिक यार्न मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में काम करती थी। भारी वित्तीय कठिनाइयों और बढ़ते एनपीए (NPA) के कारण, कंपनी को 20 नवंबर 2018 को CIRP में और 24 सितंबर 2019 को लिक्विडेशन में भेजा गया था। CIRP के दौरान, केवल एक रेजोल्यूशन प्लान मिला था, जिसे क्रेडिटर्स की कमेटी ने रिजेक्ट कर दिया था।

अब आगे क्या बदलेगा?

  • कंपनी नए एक्वायरर्स के स्वामित्व में एक गोइंग कंसर्न के रूप में काम करेगी।
  • मैनेजमेंट और ऑपरेशनल कंट्रोल नए कंसोर्टियम को ट्रांज़िशन होगा।
  • मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग एक्टिविटीज सहित बिजनेस ऑपरेशन्स के फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
  • स्कीम का उद्देश्य बकाया वित्तीय दावों (financial claims) को एक स्ट्रक्चर्ड तरीके से निपटाना है।

जोखिम पर भी नजर


  • कंपनी के पूर्व प्रमोटर्स पर गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा फंड डायवर्जन के आरोपों को लेकर जांचें चल रही हैं।

  • NCLT ने इन SFIO जांचों से संबंधित आपत्तियों को खारिज कर दिया है, लेकिन इन मामलों का अंतिम नतीजा देखना महत्वपूर्ण होगा।

  • नए मैनेजमेंट द्वारा अप्रूव्ड स्कीम के सफल इम्प्लीमेंटेशन और ऑपरेशन्स के इंटीग्रेशन पर भी नजर रखनी होगी।

नंबर्स पर एक नजर


  • NCLT द्वारा मंजूर स्कीम में एक्वायरर्स की ओर से कुल ₹52.43 करोड़ की वित्तीय प्रतिबद्धता है।

-admitted सिक्योर्ड फाइनेंशियल क्रेडिटर्स (admitted secured financial creditors) के क्लेम ₹656.78 करोड़ हैं, जिनमें से स्कीम के तहत ₹37.70 करोड़ के भुगतान का प्रस्ताव है।
  • पहले रिजेक्ट किए गए प्लान में कुल रिकवरी सिर्फ ₹14 करोड़ का प्रस्ताव था।

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