उत्तर प्रदेश के बनारस की मशहूर बनारसी साड़ियों का एक्सपोर्ट 2018 से अब तक 5 गुना बढ़ गया है। यह कमाल राज्य सरकार की 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) स्कीम की वजह से हुआ है। इस स्कीम ने लोकल प्रोडक्शन को बेहतर बनाया है और कारीगरों को फायदा पहुंचाया है। हालांकि, यह सेक्टर अभी भी पूरी तरह से ऑर्गेनाइज्ड नहीं है और इसकी परफॉरमेंस कच्चे माल की कीमत और ग्लोबल डिमांड पर निर्भर करती है।
बनारसी साड़ियों का एक्सपोर्ट बढ़ा 5 गुना
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) स्कीम का असर अब बनारसी साड़ियों के एक्सपोर्ट पर दिखने लगा है। साल 2018 के मुकाबले, बनारस की इन खास साड़ियों का एक्सपोर्ट 5 गुना बढ़ गया है। इस स्कीम ने पारंपरिक बुनकरों के लिए कैपिटल, टेक्नोलॉजी और इंटरनेशनल मार्केट तक पहुंचने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है।
प्रोडक्शन में आया नयापन
इस ग्रोथ की एक बड़ी वजह जगरतपर जैसे इलाकों में कॉमन फैसिलिटी सेंटर (Common Facility Center) का खुलना है। यहां रंगाई, स्क्रीन प्रिंटिंग और फिनिशिंग जैसे जरूरी काम एक ही जगह पर हो जाते हैं। इन सर्विस पर 90% तक की सब्सिडी मिलने से छोटे बुनकरों का खर्चा काफी कम हो गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 820 लोकल ट्रेडर्स ने ₹126 करोड़ का लोन लिया है, जिसमें ₹31 करोड़ की सब्सिडी सरकार ने ब्याज का बोझ कम करने के लिए दी है।
इस पहल का मकसद छोटे कारीगरों को बड़े बिजनेसमैन में बदलना है। प्रोडक्शन के अलावा, मार्केटिंग डेवलपमेंट असिस्टेंस (MDA) स्कीम के तहत एग्जीबिशन और यात्रा के लिए भी आर्थिक मदद दी गई है। इसकी बदौलत हजारों बुनकर अपने प्रोडक्ट्स को नेशनल और इंटरनेशनल ट्रेड इवेंट्स में दिखा पाए हैं। यहीं से एक्सपोर्ट में बड़ी उछाल आई है।
बाजार की हकीकत और खतरे
यह जानना जरूरी है कि बनारसी साड़ी इंडस्ट्री बड़े कंपनियों का सेक्टर नहीं है। यह अभी भी छोटे फैमिली बिजनेस और अलग-अलग कारीगरों का एक बिखरा हुआ बिजनेस है।
इस सेक्टर का ग्रोथ कच्चे माल की कीमतों पर बहुत निर्भर करता है। रेशम और ज़री जैसी जरूरी चीजों की कीमत बढ़ने से छोटे बुनकरों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा, एक्सपोर्ट पर ज्यादा निर्भरता के कारण यह इंडस्ट्री ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी, विदेशी खरीदारों की मांग और एक्सपोर्ट ड्यूटी में बदलाव के प्रति काफी संवेदनशील है। अगर ग्लोबल डिमांड कम हुई तो छोटे बुनकरों पर दबाव आ सकता है।
आगे क्या?
ODOP स्कीम का लॉन्ग-टर्म असर इस बात पर निर्भर करेगा कि कारीगर प्रोडक्शन कॉस्ट को कैसे मैनेज करते हैं और विदेशी व्यापार नियमों के साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं। आने वाले समय में, कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता, स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स की प्रभावशीलता और ग्लोबल एक्सपोर्ट की लगातार डिमांड इस सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
