Bureau of Indian Standards (BIS) ने देश के मुख्य कॉटन उत्पादक राज्यों में 21 टेस्टिंग लैब्स को आधुनिक बनाने के लिए **₹38.72 करोड़** का बजट मंजूर किया है। इससे भारतीय टेक्सटाइल कंपनियों को अब पहले से कहीं ज्यादा सटीक और बेहतर क्वालिटी का कच्चा माल मिल सकेगा।
लैब्स के आधुनिकीकरण से क्या बदलेगा?
Bureau of Indian Standards (BIS) द्वारा शुरू किया गया यह ₹38.72 करोड़ का प्रोग्राम कॉटन टेस्टिंग में एक नई सटीकता लाएगा। यह प्रोजेक्ट गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पंजाब, राजस्थान और कर्नाटक जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में फैली लैब्स को हाई-टेक बनाएगा। अब इन लैब्स में High Volume Instrument (HVI) और trash analysers जैसी आधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं, जिनसे कॉटन की क्वालिटी की सटीक जानकारी मिल सकेगी। अब तक 14 HVI और 28 trash analysers को Textiles Committee और Cotton Corporation of India की 13 लैब्स में तैनात भी किया जा चुका है।
टेक्सटाइल कंपनियों के लिए क्यों है अहम?
भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर के लिए कच्चे माल की गुणवत्ता हमेशा से एक बड़ा चैलेंज रही है। फिनिश्ड गुड्स में एकरूपता बनाए रखने के लिए यह सरकारी कदम एक बड़ी राहत साबित हो सकता है। यह नई टेस्टिंग सुविधा किसानों और टेक्सटाइल मिल्स के बीच के अंतर को कम करेगी। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में एक्सपोर्ट ऑर्डर हासिल करने के लिए क्वालिटी का स्टैंडर्ड होना अनिवार्य है, जहाँ यह पहल भारत की कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाएगी।
हालांकि, इसका असर लिस्टेड टेक्सटाइल कंपनियों पर सीधा न होकर इनडायरेक्ट होगा, क्योंकि इससे उन्हें बेहतर और कंसिस्टेंट कच्चा माल मिल सकेगा। आने वाले समय में लैब्स के पूरी तरह काम शुरू करने की टाइमलाइन और टेक्सटाइल कंपनियों के मैनेजमेंट की ओर से क्वालिटी ट्रेंड्स पर आने वाली कमेंट्री पर निवेशकों की नजरें टिकी रहेंगी।
