Arvind Ltd ने पहली तिमाही में **25%** की ज़बरदस्त रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, जो ₹2,501 करोड़ पर पहुँच गई। लेकिन, Dalco-GFT के अधिग्रहण से जुड़ी एकमुश्त लागतों और बढ़े फाइनेंसियल खर्चों के चलते नेट प्रॉफिट ₹53.45 करोड़ पर ही टिका रहा।
नतीजों पर भारी पड़ी अधिग्रहण की लागत
Arvind Ltd के हालिया तिमाही नतीजे बताते हैं कि कंपनी के ऑपरेशन्स में तो मजबूती आई है, लेकिन हाल ही में किए गए US अधिग्रहण की वजह से हुए अल्पकालिक खर्चों ने इन नतीजों पर असर डाला है। 30 जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए, कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू ₹2,501 करोड़ रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 25% ज़्यादा है। हालांकि, इक्विटी होल्डर्स के लिए नेट प्रॉफिट ₹53.45 करोड़ पर स्थिर रहा, जो रेवेन्यू में हुई बड़ी बढ़ोतरी के बावजूद सपाट लग रहा है।
असली तस्वीर क्या है?
इस स्थिति को समझने के लिए, निवेशकों को सिर्फ नतीजों के ऊपरी आंकड़ों से आगे देखना होगा। अगर एकमुश्त अधिग्रहण से जुड़े खर्चों को हटा दें, तो कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) असल में 47% बढ़कर ₹80 करोड़ हो गया था। रिपोर्टेड प्रॉफिट में कमी की मुख्य वजह मई 2026 में अधिग्रहित की गई US-आधारित टेक्निकल टेक्सटाइल कंपनी Dalco-GFT का एकीकरण है। इस अधिग्रहण में लगभग ₹23 करोड़ के असाधारण नेट-ऑफ-टैक्स खर्च, ₹10.7 करोड़ की बढ़ी हुई डेप्रिसिएशन (Depreciation) और ट्रांजेक्शन के लिए लिए गए लोन से जुड़े ₹10.6 करोड़ के अतिरिक्त फाइनेंसियल खर्चे शामिल हैं।
ऑपरेशन्स में मजबूती जारी
इसके बावजूद, कंपनी का बिजनेस हेल्थ मजबूत बना हुआ है। अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्सेस, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन (EBITDA) 39% बढ़कर ₹258 करोड़ हो गया। इससे EBITDA मार्जिन पिछले साल के 9.3% से सुधरकर 10.3% पर पहुँच गया। एडवांस मटेरियल बिजनेस (AMB) एक बड़ा बूस्टर साबित हुआ, जिसने रेवेन्यू में 85% की भारी उछाल दर्ज की। इस सेगमेंट की ग्रोथ कंपनी के ऑटोमोटिव और जियोटेक्सटाइल जैसे सेक्टर्स में हाई-वैल्यू वाले इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स की ओर स्ट्रैटेजिक शिफ्ट को दर्शाती है।
आगे क्या देखना होगा?
शेयरहोल्डर्स के लिए, Dalco-GFT का सफल एकीकरण एक महत्वपूर्ण फैक्टर बना रहेगा। जहां यह डील US मार्केट में कंपनी की मौजूदगी को बढ़ाती है, वहीं अल्पावधि में यह डेट (Debt) और डेप्रिसिएशन का दबाव भी बढ़ाएगी। कंपनी ने ₹500 करोड़ के QIP (Qualified Institutional Placement) को पूरा करके अपने डेट लेवल्स को कम करने के लिए बैलेंस शीट को संभालने के कदम उठाए हैं। भविष्य में, निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी इन अधिग्रहण लागतों को कितनी जल्दी सामान्य कर पाती है और क्या कॉटन जैसी कच्ची सामग्रियों की कीमतें स्थिर रहती हैं, ताकि ग्लोबल ट्रेड की अनिश्चितताओं के बीच प्रॉफिट मार्जिन सुरक्षित रह सकें।
