Vodafone Idea (Vi) के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में अपने नेट लॉस (Net Loss) को घटाकर **₹3,754 करोड़** कर लिया है। यह सुधार एक बार के लीगल सेटलमेंट से हुए फायदे और बढ़ी हुई कमाई के दम पर हुआ है। सबसे खास बात यह है कि कंपनी ने मर्जर के बाद पहली बार सब्सक्राइबर बेस में पॉजिटिव ग्रोथ दर्ज की है।
Vi के नतीजों पर एक नज़र
Vodafone Idea (Vi) ने 30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए अपने वित्तीय नतीजों में खास सुधार दिखाया है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी को ₹6,608 करोड़ का घाटा हुआ था, जबकि इस बार यह घटकर ₹3,754 करोड़ रह गया है। कंपनी की रेवेन्यू (Revenue) में 6% की बढ़ोतरी हुई है, जो ₹11,689 करोड़ तक पहुंच गई। इसके अलावा, लीगल और रेगुलेटरी सेटलमेंट से ₹1,611 करोड़ का एक बार का अकाउंटिंग गेन भी कंपनी के मुनाफे में शामिल है।
सब्सक्राइबर ग्रोथ में पहली बार तेजी
इन नतीजों की सबसे बड़ी हाइलाइट सब्सक्राइबर नंबर्स में आई तेजी है। मर्जर के बाद पहली बार, Vodafone Idea ने अपने सब्सक्राइबर बेस में नेट पॉजिटिव इंक्रीमेंट दर्ज किया है। इससे कंपनी के कुल एक्टिव यूजर्स की संख्या बढ़कर 19.31 करोड़ हो गई है। प्रति यूजर एवरेज रेवेन्यू (ARPU) भी 10.2% बढ़कर ₹195 पर पहुंच गया है। यह दिखाता है कि Vi की सर्विस क्वालिटी सुधारने और प्रीमियम यूजर्स को आकर्षित करने की कोशिशें रंग ला रही हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश
CEO अभिजीत किशोर ने इस फाइनेंशियल ईयर को कंपनी के लिए 'एग्जीक्यूशन का साल' बताया है। इसी रणनीति के तहत, Vodafone Idea ने अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने और बेहतर बनाने के लिए ₹9,000 करोड़ के नए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) के ऑर्डर दिए हैं। कंपनी 5G सर्विसेज को तेजी से फैला रही है, जो अब भारत के 200 से ज्यादा शहरों में लाइव हैं। कंपनी के पास ₹6,558 करोड़ की कैश और बैंक बैलेंस है, जिसका इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देने में किया जाएगा।
आगे की राह और चुनौतियां
हालांकि, यह खबरें सकारात्मक हैं, लेकिन भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में मुकाबला बहुत कड़ा है। यूजर्स को आकर्षित करने और प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने का दबाव लगातार बना हुआ है। कंपनी ने अपने शॉर्ट-टर्म बैंक डेट को ₹211 करोड़ तक मैनेज किया है, लेकिन लॉन्ग-टर्म लायबिलिटीज (Long-term Liabilities) और फाइनेंसिंग कॉस्ट को मैनेज करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। इस तिमाही की सब्सक्राइबर ग्रोथ को लॉन्ग-टर्म ट्रेंड में बदलना कंपनी की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी के लिए महत्वपूर्ण होगा।
निवेशकों को अब ₹9,000 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की प्रगति और कंपनी द्वारा मौजूदा ARPU ग्रोथ को बनाए रखने की क्षमता पर नजर रखनी होगी। साथ ही, 5G सर्विसेज के विस्तार के बीच सब्सक्राइबर एडिशन की रफ्तार बनाए रखना भी देखना अहम होगा।
