प्रमोटर का भरोसा और रेगुलेटरी सहारा
Vodafone Idea के शेयर में हालिया उछाल के पीछे दो बड़ी वजहें हैं: एक तरफ प्रमोटर की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी और दूसरी तरफ AGR बकाये पर मिली राहत। आइए, जानते हैं कि यह राहत कितनी बड़ी है और इससे कंपनी की राह कितनी आसान हुई है।
हाल ही में, आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने Vodafone Idea में 59.6 मिलियन शेयर खरीदे हैं। यह खरीद करीब ₹66.18 करोड़ की है, जिससे ओपन मार्केट में उनकी हिस्सेदारी बढ़कर 0.07% हो गई है। यह कदम कंपनी के प्रति प्रमोटर के भरोसे को दिखाता है।
इसी के साथ, सरकार से एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) के बकाये पर मिली राहत ने भी कंपनी को बड़ी राहत दी है। पहले यह बकाया करीब ₹87,700 करोड़ था, लेकिन अब इसे वित्त वर्ष 2041 (FY41) तक किश्तों में चुकाने की मोहलत मिल गई है। इससे कंपनी पर तत्काल नकदी का दबाव कम हुआ है। इन दो सकारात्मक खबरों के चलते 10 फरवरी 2026 को Vodafone Idea के शेयर में सक्रिय ट्रेडिंग देखने को मिली और यह ₹11.58 के स्तर तक पहुंचा।
गहरी पड़ताल: आंकड़े क्या कहते हैं?
भारतीय टेलीकॉम बाज़ार, जहां डिजिटलाइजेशन और 5G की मांग तेजी से बढ़ रही है, 2034 तक $72.32 बिलियन का हो जाने का अनुमान है। इस सेक्टर में रेवेन्यू में भी जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है, जो 2019 के बाद लगभग दोगुनी हो गई है। टैरिफ में बढ़ोतरी के कारण एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) भी बढ़कर ₹193 (सितंबर 2024 तक) हो गया है।
हालांकि, Vodafone Idea का ARPU तिमाही 3 (Q3) फाइनेंशियल ईयर 26 (FY26) तक केवल ₹172 पर है, जो अपने कॉम्पिटीटर्स से कम है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन फरवरी 2026 तक करीब ₹1.25 ट्रिलियन है, जो इसे मिड-कैप सेगमेंट में रखता है।
लेकिन सबसे बड़ी चिंता कंपनी के लगातार घाटे में रहने को लेकर है। फरवरी 2026 तक इसका प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो -5.10 है, जो कि लगातार निगेटिव है। वहीं, मार्केट लीडर भारती एयरटेल का P/E रेश्यो करीब 38.9 है। Vodafone Idea का प्राइस-टू-बुक (P/B) रेश्यो -1.43 भी इसके साथियों की औसत वैल्यू से काफी कम है। कई विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी का इंट्रिंसिक वैल्यू मात्र ₹3.83 है, जिसका मतलब है कि मौजूदा मार्केट प्राइस काफी ज्यादा हो सकता है।
चुनौतियां अभी भी बरकरार
बावजूद इसके कि प्रमोटर ने भरोसा जताया है और रेगुलेटरी राहत मिली है, Vodafone Idea के सामने बड़ी चुनौतियाँ हैं। कंपनी ने मार्च 2025 में अपना 5G नेटवर्क लॉन्च किया, जबकि Reliance Jio और Bharti Airtel जैसी कंपनियां 2022 से ही अपनी 5G सेवाएं दे रही हैं। 5G सेगमेंट में पिछड़ने से उसे मार्केट शेयर गंवाने का खतरा है।
कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ कमजोर बनी हुई है। बुक वैल्यू निगेटिव है और लगातार घाटा हो रहा है, जैसा कि इसके गहरे निगेटिव P/E रेश्यो से जाहिर होता है।
AGR राहत भले ही बड़ी हो, लेकिन इसके लिए भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) की जरूरत खत्म नहीं हुई है। Vodafone Idea अगले तीन सालों में अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ₹45,000 करोड़ का निवेश करने की योजना बना रही है। हालांकि, ऊंचे स्पेक्ट्रम शुल्क और मौजूदा कर्ज का बोझ पहले से ही इसकी खर्च क्षमता पर दबाव डाल रहा है।
बाजार हिस्सेदारी की बात करें तो, सितंबर 2025 तक Vodafone Idea के पास वायरलेस सब्सक्राइबर मार्केट शेयर का करीब 17.44% हिस्सा है। यह Reliance Jio (41.08%) और Bharti Airtel (33.59%) से काफी पीछे है।
कई एनालिस्ट्स अभी भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। 21 एनालिस्ट्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले 12 महीनों के लिए औसत प्राइस टारगेट ₹9.40 है, जो मौजूदा स्तरों से गिरावट का संकेत देता है। कंपनी की 'Mojo Grade' को हाल ही में 'Strong Sell' से घटाकर 'Sell' कर दिया गया है, जो इसकी लगातार फंडामेंटल चिंताओं को दर्शाता है।
आगे की राह
Vodafone Idea का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि वह कितनी प्रभावी ढंग से अपनी महत्वाकांक्षी पुनरुद्धार योजना को लागू कर पाती है, खासकर तीव्र बाजार प्रतिस्पर्धा के बीच। रेगुलेटरी सपोर्ट और प्रमोटर की प्रतिबद्धता एक महत्वपूर्ण सहारा हैं, लेकिन कंपनी को लाभप्रदता और बाजार हिस्सेदारी में लगातार वृद्धि की दिशा में एक स्पष्ट रोडमैप दिखाना होगा।
ब्रोकरेज फर्मों की रिपोर्टों में औसत प्राइस टारगेट ₹8.67 का सुझाव दिया गया है, जो दर्शाता है कि बाजार अभी भी अल्पावधि से मध्यावधि में पूर्ण सुधार को लेकर संशय में है। कैपिटल को प्रभावी ढंग से लगाने, नेटवर्क की गुणवत्ता पर प्रतिस्पर्धा करने और ARPU को बेहतर बनाने की क्षमता इसके दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण होगी।