Vodafone Idea (Vi) ने अगले तीन सालों के लिए ₹45,000 करोड़ के बड़े नेटवर्क इन्वेस्टमेंट प्लान का ऐलान किया है। कंपनी का लक्ष्य इस निवेश से रेवेन्यू में डबल डिजिट ग्रोथ हासिल करना और कैश EBITDA को तीन गुना करना है। यह कदम ऐसे समय आया है जब कंपनी के Q1 FY27 के नतीजे आए हैं, जिसमें नेट लॉस कम हुआ और ARPU में सुधार दिखा है। अब देखना यह है कि क्या यह भारी-भरकम कैपिटल एक्सपेंडिचर Vi को इस बेहद कॉम्पिटिटिव सेक्टर में अपने बड़े प्रतिद्वंद्वियों के सामने मार्केट शेयर वापस पाने में मदद कर पाएगा।
Vi का बड़ा प्लान: ₹45,000 करोड़ का नेटवर्क इन्वेस्टमेंट
Vodafone Idea (Vi) ने अपनी 3-साल की ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर मुहर लगा दी है। कंपनी अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में पूरे ₹45,000 करोड़ (लगभग $4.72 बिलियन) का भारी निवेश करने जा रही है। Vi का साफ कहना है कि इस निवेश का सीधा मकसद रेवेन्यू में डबल डिजिट ग्रोथ हासिल करना और कैश EBITDA को तीन गुना करना है। यह घोषणा कंपनी के FY27 की पहली तिमाही के नतीजों के बाद आई है, जिसने कंपनी के फाइनेंशियल टर्नअराउंड के शुरुआती संकेत दिए हैं।
नतीजों में सुधार, ARPU बढ़ा
30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में Vodafone Idea का रेवेन्यू 6% बढ़कर ₹11,689 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में ज्यादा है। कंपनी का नेट लॉस भी काफी कम होकर ₹3,754 करोड़ रह गया, जबकि पिछले साल यह ₹6,611 करोड़ था। इस सुधार में Average Revenue Per User (ARPU) का 10.2% बढ़कर ₹195 होना एक अहम फैक्टर रहा, जिससे पता चलता है कि ग्राहक अब नेटवर्क पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं।
नेटवर्क अपग्रेडेशन और 5G एक्सपेंशन
₹45,000 करोड़ का यह कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान नेटवर्क की पहुंच और क्वालिटी को इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स के मुताबिक अपग्रेड करने पर केंद्रित है। इस रोलआउट को शुरू करने के लिए, Vi ने Ericsson, Nokia और Samsung जैसे ग्लोबल टेक पार्टनर्स के साथ ₹9,000 करोड़ के इक्विपमेंट ऑर्डर पहले ही दे दिए हैं। कंपनी के प्लान के मुताबिक, हर महीने लगभग 3,500 नए 4G साइट्स लगाए जाएंगे। इसके अलावा, आने वाली तिमाहियों में कंपनी अपनी 5G कवरेज को 200 से ज्यादा शहरों तक फैलाने का इरादा रखती है, जो कि कॉम्पिटिशन में बने रहने के लिए बेहद जरूरी है।
फंडिंग की स्थिति और चुनौतियां
इस बड़े विस्तार के लिए फंडिंग सबसे अहम कड़ी है। Vi ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम से ₹6,400 करोड़ की शुरुआती रकम हासिल कर ली है। कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि पब्लिक और प्राइवेट लेंडर्स से अतिरिक्त कैपिटल के लिए बातचीत जारी है। भारतीय सरकार के पास कंपनी में लगभग 50% हिस्सेदारी है (बकाए को इक्विटी में बदलने के बाद), जो Vi को प्राइवेट सेक्टर की दूसरी कंपनियों से अलग बनाती है।
हालांकि, इस बड़े निवेश के लक्ष्यों के बावजूद, कंपनी के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में Reliance Jio और Bharti Airtel जैसी कंपनियों का दबदबा है। ऐसे में, निवेशकों की नजर Vi की काबिलियत पर रहेगी कि वह देरी या लागत बढ़ने के बिना इस महत्वाकांक्षी प्लान को कितनी अच्छी तरह लागू कर पाती है। शेयरधारकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क कंपनी पर भारी कर्ज का बोझ और इतने बड़े पैमाने पर कैपिटल प्रोजेक्ट्स को फंड करते हुए सब्सक्राइबर बेस को बनाए रखने और बढ़ाने की चुनौती है। भविष्य में लेंडर की बातचीत, प्रोजेक्ट शुरू होने की टाइमलाइन और ARPU में लगातार सुधार जैसे अपडेट्स मार्केट के लिए अहम रहेंगे।
