5 साल में पहली बार सब्सक्राइबर बढ़े
लगभग पांच साल की लगातार गिरावट के बाद, भारत की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea (VIL) ने आखिरकार सब्सक्राइबर के मोर्चे पर एक पॉजिटिव आंकड़ा दर्ज किया है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के अनुसार, VIL ने फरवरी 2026 में 21,927 नेट सब्सक्राइबर जोड़े। यह जनवरी में देखे गए 4.11 लाख के सब्सक्राइबर घाटे और पिछले कई महीनों की लगातार गिरावट से एक बड़ा बदलाव है। इस खबर के बाद VIL के शेयर में बुधवार को मामूली 1.4% की उछाल देखी गई और यह ₹8.65 पर पहुंच गया। हालांकि, यह शेयर अपने 52-हफ्ते के हाई ₹12.80 से लगभग 32% नीचे चल रहा है। बाजार की यह धीमी प्रतिक्रिया बताती है कि अकेले सब्सक्राइबर का बढ़ना कंपनी की गहरी वित्तीय और परिचालन समस्याओं को दूर करने के लिए काफी नहीं है।
प्रतिद्वंद्वी कर रहे हैं 5G में राज
VIL के इस मामूली सब्सक्राइबर इजाफे की तुलना इसके मुख्य प्रतिस्पर्धियों से की जाए तो तस्वीर बिल्कुल अलग दिखती है। फरवरी 2026 में, Bharti Airtel ने अनुमानित 4.86 मिलियन (48.6 लाख) वायरलेस सब्सक्राइबर जोड़े, जिससे उसके कुल यूजर्स 472.65 मिलियन हो गए। वहीं, Reliance Jio ने भी लगभग 2.4 मिलियन (24 लाख) सब्सक्राइबर जोड़कर अपनी बढ़त बनाए रखी, जिसके बाद उसके कुल यूजर्स 493.11 मिलियन पर पहुंच गए। ये आंकड़े Jio और Airtel के बीच बढ़ते 'डुओपोली' (duopoly) यानी दो दिग्गजों के दबदबे को दिखाते हैं, जो तेजी से अपने 5G नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं और प्रति यूजर औसत रेवेन्यू (ARPU) भी बढ़ा रहे हैं। VIL का ARPU, जो दिसंबर 2025 तक ₹172 प्रति माह था, अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी कम है। इसके अलावा, VIL का एक्टिव यूजर रेशियो 85.24% है, जो Airtel के 99.42% और Jio के 98.35% की तुलना में काफी कम है। यह नेटवर्क विश्वसनीयता या यूजर एंगेजमेंट की समस्याओं की ओर इशारा करता है। हालांकि, भारतीय टेलीकॉम बाजार में मजबूत ग्रोथ की उम्मीद है, जिसके 2033 तक $114.47 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, लेकिन VIL की इस ग्रोथ को भुनाने की क्षमता संदिग्ध बनी हुई है। इसका मुख्य कारण 5G जैसे क्षेत्रों में नेटवर्क निवेश में देरी और उसका 17-18% के आसपास बना रहने वाला मार्केट शेयर है।
भारी कर्ज और रेगुलेटरी दबाव
सब्सक्राइबर में दुर्लभ वृद्धि के बावजूद, Vodafone Idea की मुश्किल वित्तीय स्थिति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कंपनी लगातार घाटे में चल रही है और उसका P/E रेशियो नेगेटिव है। 1 अप्रैल, 2026 तक, कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग ₹93,717 करोड़ था, लेकिन इसका बुक वैल्यू नेगेटिव है। VIL पर भारी कर्ज है, मार्च 2025 तक उसका नेट कर्ज INR 1,873 बिलियन (1,87,300 करोड़ रुपये) दर्ज किया गया था। 2026 से शुरू होने वाले वार्षिक कर्ज भुगतान INR 200 बिलियन (20,000 करोड़ रुपये) से अधिक होने की उम्मीद है। सरकार से एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाये पर राहत मिलने से कुछ सांस लेने की जगह मिली है, लेकिन कुल देनदारी बहुत ज्यादा है और भुगतान योजना 2041 तक चलती है। VIL पर ₹6.03 लाख का कमर्शियल कम्युनिकेशन नियमों के पालन न करने पर और ₹3 लाख का क्वालिटी ऑफ सर्विस नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना भी लगा है। एनालिस्ट्स सतर्क बने हुए हैं, उनकी आम सहमति 'होल्ड' (Hold) रेटिंग है और टारगेट प्राइस औसतन ₹9.98 है। यह टारगेट प्राइस वर्तमान ट्रेडिंग स्तर के करीब है और HSBC जैसे एनालिस्ट्स के पिछले टारगेट्स से भी कम है, जिन्होंने 'रिड्यूस' (Reduce) की सिफारिश की थी। कंपनी को बड़े फंड जुटाने की जरूरत है, और तीन साल में ₹45,000 करोड़ के नियोजित कैपिटल एक्सपेंडिचर (CAPEX) से वित्तीय दबाव और बढ़ जाता है।
आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण
Vodafone Idea के लिए आगे का रास्ता मुश्किल बना हुआ है, भले ही हालिया पॉजिटिव सब्सक्राइबर आंकड़ों से थोड़ी राहत मिली हो। लगातार सब्सक्राइबर ग्रोथ हासिल करने और वित्तीय सेहत सुधारने की कंपनी की क्षमता बड़े फंड जुटाने, नेटवर्क विस्तार और मजबूत वित्तीय स्थिति वाले प्रतिद्वंद्वियों से भरे बाजार में प्रतिस्पर्धा करने पर निर्भर करती है। ब्रोकरेज फर्मों की आम सहमति 'होल्ड' रेटिंग और करीब ₹9.98 के औसत प्राइस टारगेट के साथ, मौजूदा संरचनात्मक मुद्दों के कारण सीमित अपसाइड पोटेंशियल (upside potential) का संकेत मिलता है। एक वास्तविक टर्नअराउंड (turnaround) के लिए सिर्फ सब्सक्राइबर घाटे को रोकना ही काफी नहीं है, बल्कि लाभप्रदता (profitability) और बाजार स्थिति में स्पष्ट सुधार की आवश्यकता होगी।