भारत में टेलीकॉम सेक्टर ने जून में अच्छी रफ्तार पकड़ी है। कुल सब्सक्राइबर बेस बढ़कर **1.348 अरब** (134.8 करोड़) हो गया है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी Bharti Airtel और Reliance Jio की रही, जिन्होंने मिलकर **5.45 मिलियन** नए ग्राहक जोड़े हैं।
Detailed Coverage
सब्सक्राइबरों की दौड़ में कौन आगे?
जून 2026 में, भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में कुल सब्सक्राइबरों की संख्या 134.8 करोड़ तक पहुंच गई। इस ग्रोथ का मुख्य कारण प्राइवेट सेक्टर के दिग्गज Bharti Airtel और Reliance Jio रहे, जिन्होंने मिलकर करीब 5.45 मिलियन नए यूजर्स को अपने नेटवर्क से जोड़ा। कुल मिलाकर, इस अवधि में इंडस्ट्री में 0.37% की बढ़ोतरी देखी गई।
Bharti Airtel इस महीने में सबसे आगे रही, जिसने अपने मोबाइल और फिक्स्ड-लाइन सर्विसेज में 3.16 मिलियन नए सब्सक्राइबर जोड़े। वहीं, Reliance Jio ने 2.29 मिलियन नए यूजर्स को ऑनबोर्ड किया। इन दोनों कंपनियों ने इंडस्ट्री के कुल 6.2 मिलियन नए सब्सक्राइबर एडिशन का लगभग 87% हिस्सा अपने नाम किया। देश में वायरलेस कनेक्शन की कुल संख्या 130 करोड़ तक पहुंच गई, जिसका मुख्य कारण कंज्यूमर मोबाइल सिम कार्ड की लगातार बढ़ती डिमांड है।
हालांकि, वायरलाइन (फिक्स्ड-लाइन) सब्सक्राइबर बेस में 1.67% की गिरावट आई और यह 4.78 करोड़ पर आ गया। इस गिरावट का मुख्य कारण सरकारी कंपनी BSNL के फिक्स्ड-लाइन सेगमेंट में हुए नुकसान को माना जा रहा है। लेकिन, इस गिरावट के बावजूद, ब्रॉडबैंड सब्सक्राइबरों की संख्या में लगातार इजाफा देखा गया और यह जून के अंत तक 108.75 करोड़ के पार पहुंच गया। ब्रॉडबैंड मार्केट में Reliance Jio अपनी लीड बनाए हुए है, जबकि Bharti Airtel भी एक मजबूत पोजीशन पर बनी हुई है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
यह डेटा निवेशकों को बताता है कि मार्केट कंसॉलिडेशन (समेकन) का ट्रेंड बढ़ रहा है, जहां ग्रोथ अब बड़े प्राइवेट प्लेयर्स के हाथों में केंद्रित हो रही है। सब्सक्राइबरों की संख्या बाजार हिस्सेदारी का एक अहम पैमाना है, लेकिन आने वाली तिमाहियों में कंपनियों का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस इस बात पर भी निर्भर करेगा कि वे नए यूजर्स को हाई-वैल्यू डेटा कस्टमर में कितना बदल पाती हैं। ब्रॉडबैंड यूजर्स में लगातार हो रही बढ़ोतरी डिजिटल सर्विसेज से रेवेन्यू के लिए एक पॉजिटिव संकेत है। वहीं, सरकारी ऑपरेटर्स के फिक्स्ड-लाइन सब्सक्राइबरों का कम होना, उपभोक्ताओं की बदलती पसंद या उस सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा की ओर इशारा करता है।
निवेशक आने वाली रिपोर्ट्स में एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) और प्रॉफिट मार्जिन्स पर नजर रख सकते हैं, क्योंकि सब्सक्राइबर ग्रोथ हमेशा सीधे तौर पर कमाई में बढ़ोतरी में तब्दील नहीं होती। नेटवर्क विस्तार, जिसमें 5G रोलआउट भी शामिल है, पर कैपिटल खर्च को मैनेज करते हुए इन ग्रोथ रेट्स को बनाए रखने की इंडस्ट्री की क्षमता, आने वाली तिमाही रिपोर्ट्स में ट्रैक करने के लिए एक अहम फैक्टर रहेगी।
