साल 2026 में टेलीकॉम यूजर्स ने स्पैम कॉल्स और मैसेज के खिलाफ **17 लाख** से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई हैं। इस समस्या से निपटने के लिए, टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने 2024 से अब तक **21.6 लाख** से अधिक अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटिंग लाइनों को बंद कर दिया है। यह कदम उन बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के लिए कितना फायदेमंद होगा, यह देखना बाकी है।
Detailed Coverage
शिकायतों का अंबार जारी
भारतीय टेलीकॉम सब्सक्राइबर्स को लगातार अनचाही कमर्शियल कॉल्स और मैसेज का सामना करना पड़ रहा है। मई 2026 तक 17.22 लाख से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गईं। यह स्थिति 2025 की तुलना में थोड़ी बेहतर है, जब 31.09 लाख शिकायतें सामने आई थीं। ये स्पैम कॉल्स और मैसेज उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बने हुए हैं।
रेगुलेटरी एक्शन और कनेक्शन बंद
इन समस्याओं को देखते हुए, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) और टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स ने सख्ती बरतना शुरू कर दिया है। जनवरी 2024 से अब तक, सर्विस प्रोवाइडर्स ने 21.6 लाख से ज्यादा उन अनरजिस्टर्ड टेलीमार्केटर्स के कनेक्शन काट दिए हैं, जो अक्सर स्पैम कॉल्स और SMS के लिए जिम्मेदार होते हैं। इस कदम से यूजर्स तक पहुंचने वाले अनचाहे कम्युनिकेशन की मात्रा को कम करने का लक्ष्य है।
AI और DND का बढ़ता इस्तेमाल
इन अनचाहे कम्युनिकेशन को मैनेज करने में टेक्नोलॉजी अहम भूमिका निभा रही है। 'डू नॉट डिस्टर्ब' (DND) प्लेटफॉर्म, जो यूजर्स को कमर्शियल कॉल्स और मैसेज से ऑप्ट-आउट करने की सुविधा देता है, पर अब तक करीब 24.53 करोड़ रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। मई 2026 तक, इस सिस्टम ने रोजाना औसतन 27.7 करोड़ प्रमोशनल कॉल्स और मैसेज को ब्लॉक किया है। इसके अलावा, प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने अपने नेटवर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स को इंटीग्रेट किया है। ये AI सिस्टम फिलहाल रोजाना औसतन 26.4 करोड़ कॉल्स और मैसेज को संदिग्ध स्पैम के तौर पर फ्लैग कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
निवेशकों के लिए, इन उपायों का सीधा असर AI-आधारित स्पैम डिटेक्शन सिस्टम को बनाए रखने के लिए जरूरी ऑपरेशनल और कैपिटल खर्च पर पड़ेगा। जहाँ ये टूल्स यूजर एक्सपीरियंस को बेहतर बनाते हैं और टेलीकॉम कंपनियों को सरकारी नियमों का पालन करने में मदद करते हैं, वहीं इनकी Ongoing टेक्नोलॉजी कॉस्ट भी है। निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि क्या ये रेगुलेटरी एक्शन कस्टमर रिटेंशन रेट में सुधार लाते हैं या फिर कंप्लायंस और टेक्नोलॉजी इम्प्लीमेंटेशन की बढ़ी हुई लागत बड़ी टेलीकॉम कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव डालती है। AI टूल्स की प्रभावशीलता और स्पैम कंट्रोल पर सरकार के अगले निर्देशों पर भविष्य के अपडेट्स महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि ये भारतीय टेलीकॉम सेक्टर की ऑपरेशनल एफिशिएंसी और सर्विस क्वालिटी को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।
