Cyclone Arnab: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में बहाल हो रही टेलिकॉम सेवाएं, निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Cyclone Arnab: आंध्र प्रदेश और ओडिशा में बहाल हो रही टेलिकॉम सेवाएं, निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

Cyclone Arnab की मार झेलने के बाद अब आंध्र प्रदेश और ओडिशा में नेटवर्क कनेक्टिविटी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। Department of Telecommunications (DoT) और प्रमुख टेलिकॉम कंपनियों ने आपातकालीन मोबाइल टावर और इंट्रा-सर्कल रोमिंग के जरिए सेवाओं को दुरुस्त करने का काम तेज कर दिया है।

तूफान के चलते ऑप्टिकल फाइबर और बिजली के बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार और प्राइवेट ऑपरेटर्स ने डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोटोकॉल एक्टिवेट किए हैं। राहत और बचाव कार्य जारी रहने के कारण तटीय इलाकों में कनेक्टिविटी को बहाल करना फिलहाल कंपनियों की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

ऑपरेशन्स पर कितना असर?

जब भी चक्रवात जैसी आपदा आती है, टेलिकॉम कंपनियों के खर्चों में अस्थायी बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इसमें डैमेज हुए इक्विपमेंट को बदलना, रिपेयरिंग टीम की तैनाती और बिजली ग्रिड ठप होने पर डीजल जनरेटर के लिए ईंधन का बढ़ा हुआ खर्च शामिल है। बिजली की बहाली न होने तक Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसी कंपनियों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन ने 'इंट्रा-सर्कल रोमिंग' (Intra-Circle Roaming) की सुविधा दी है, जिससे उपभोक्ता किसी भी उपलब्ध नेटवर्क का सिग्नल चुन सकते हैं।

रिकवरी और ग्राउंड रिपोर्ट

आंध्र प्रदेश में नेटवर्क उपलब्धता 99% तक पहुंच गई है, जो काफी सकारात्मक है। हालांकि, पश्चिम गोदावरी और कोनासीमा जैसे कुछ जिलों में अभी भी काम जारी है। गैप को भरने के लिए कंपनियां 'सेल ऑन व्हील्स' (Cell on Wheels) यानी पोर्टेबल मोबाइल टावर का सहारा ले रही हैं। ओडिशा के गंजम, गजपति और कंधमाल जैसे इलाकों में भी बाढ़ का पानी उतरते ही मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है।

निवेशकों के लिए जरूरी बातें (Investor Monitorables)

इन्वेस्टर्स के लिए इस तिमाही में ऑपरेशनल मार्जिन (Operational Margins) पर पड़ने वाला असर देखना अहम होगा। हालांकि, ऐसी आपदाओं को टेलिकॉम सेक्टर के 'रूटीन ऑपरेशनल रिस्क' का हिस्सा माना जाता है, लेकिन अगर सर्विस डाउनटाइम लंबा खिंचता है, तो इससे सब्सक्राइबर्स के टूटने (Churn) का खतरा हो सकता है। फिलहाल निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कितनी जल्दी पूरी क्षमता (Full Capacity) बहाल होती है और क्या बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए कोई बड़ा कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) सामने आता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.