Telecom AGR में उछाल, पर Airtel की बढ़ी टेंशन! Vi को मिली बड़ी राहत

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AuthorAditya Rao|Published at:
Telecom AGR में उछाल, पर Airtel की बढ़ी टेंशन! Vi को मिली बड़ी राहत
Overview

भारतीय टेलीकॉम सेक्टर के लिए एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) में अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में **2.33%** का इजाफा हुआ है, जो **₹84,270 करोड़** तक पहुंच गया है। हालांकि, यह ऊपरी बढ़त इंडस्ट्री के अंदरूनी वित्तीय मतभेदों को छिपा रही है। जहां एक ओर Bharti Airtel अपनी भारी AGR देनदारियों को लेकर सरकार से राहत की मांग कर रही है, वहीं Vodafone Idea (Vi) को सरकारी मोरेटोरियम (Debt Moratorium) के रूप में बड़ी वित्तीय छूट मिली है।

AGR ग्रोथ और अंदरूनी चुनौतियां

टेलीकॉम रेगुलेटर के आंकड़ों के मुताबिक, टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने अक्टूबर-दिसंबर 2025 की अवधि में अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) में तिमाही-दर-तिमाही 2.33% की बढ़त दर्ज की है, जो बढ़कर ₹84,270 करोड़ हो गया। इसी दौरान, Applicable Gross Revenue (ApGR) में 2.28% और Gross Revenue (GR) में 2.65% की वृद्धि देखी गई। साल-दर-साल आधार पर देखें तो AGR में 8.13% की ग्रोथ दर्ज की गई, जो GR ग्रोथ से भी बेहतर है। कुल AGR में एक्सेस सर्विसेज का योगदान 84.54% रहा।

सब्सक्राइबर बेस और रिपोर्टिंग में बदलाव

दिसंबर 2025 तक, टेलीकॉम सब्सक्राइबर बेस 6.28% बढ़कर 130.61 करोड़ हो गया, जिससे टेली-डेंसिटी 91.74% तक पहुंच गई। हालांकि, Bharti Airtel के सब्सक्राइबर ग्रोथ में बढ़ोतरी का एक हिस्सा कंपनी की रिपोर्टिंग मेथोडोलॉजी में बदलाव को भी जाता है, जिसमें अब M2M (Machine-to-Machine) सेलुलर सब्सक्राइबर बेस को भी शामिल किया गया है। यह बदलाव कंपनी के वास्तविक सब्सक्राइबर अधिग्रहण की दर को समझने में थोड़ी मुश्किल पैदा कर सकता है।

AGR देनदारियों का बोझ

AGR में बढ़ोतरी का सीधा मतलब सरकार को जाने वाले लेवी (Levies) में इजाफा होना है, जो ऑपरेटर्स के लिए एक बड़ी वित्तीय चुनौती बनी हुई है। अपनी FY25 की एनुअल रिपोर्ट के अनुसार, ₹38,604 करोड़ की आस्थगित (Deferred) AGR देनदारियों का सामना कर रही Bharti Airtel ने दूरसंचार विभाग (DoT) से अपनी बकाया राशि, जो लगभग ₹48,103 करोड़ बताई जा रही है, के पुनर्मूल्यांकन (Reassessment) का अनुरोध किया है। कंपनी इसे कानूनी विवाद नहीं, बल्कि एक गणितीय सुधार का मामला बता रही है।

Vodafone Idea को मिली बड़ी राहत

इसके विपरीत, Vodafone Idea (Vi) को सरकार से महत्वपूर्ण राहत मिली है। सरकार ने Vi की ₹87,695 करोड़ की AGR देनदारियों को फ्रीज कर दिया है और FY32 से शुरू होने वाले भुगतानों के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर 5 साल का मोरेटोरियम लागू किया है। इसका मतलब है कि Vi इन भुगतानों को FY41 तक पूरा कर सकेगी। इस राहत पैकेज में पुरानी देनदारियों को फिर से शेड्यूल करना भी शामिल है, जो Vi के तत्काल पुनर्भुगतान के बोझ को काफी कम करता है। इसे बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने और सब्सक्राइबर सेवाओं को चालू रखने के सरकारी प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

टेलीकॉम सेक्टर की वित्तीय सेहत

Bharti Airtel और Vodafone Idea की वित्तीय स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर दिखता है। ₹11.4 ट्रिलियन से अधिक के मार्केट कैपिटलाइजेशन वाली Bharti Airtel का P/E रेश्यो 37-49 के बीच है और इसका रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) लगभग 11.45% से 26.85% के बीच है। वहीं, Vodafone Idea का P/E रेश्यो लगभग -4.5 के आसपास नकारात्मक है, बुक वैल्यू प्रति शेयर भी नकारात्मक है, और मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1.11 ट्रिलियन है, जिसका शेयर प्राइस ₹10.30 के करीब चल रहा है।

आगे का रास्ता

समग्र टेलीकॉम सेक्टर पर ₹6.4 लाख करोड़ का भारी डेट (Debt) है, जिसमें आस्थगित देनदारियां एक बड़ा हिस्सा हैं। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, डेटा की बढ़ती खपत, 5G रोलआउट और टैरिफ में समायोजन के कारण फाइनेंशियल ईयर 2030 तक एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू में 9.8% का CAGR (Compound Annual Growth Rate) देखने को मिल सकता है। हालांकि, व्यक्तिगत ऑपरेटर्स के लिए राह अलग-अलग होगी। Bharti Airtel अपनी AGR देनदारियों के बीच ARPU ग्रोथ और नेटवर्क निवेश जैसे क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन जारी रखे हुए है। Vodafone Idea का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वह मोरेटोरियम का कितना फायदा उठा पाती है, नई पूंजी जुटा पाती है और अपने परिचालन व वित्तीय प्रदर्शन को कितना बेहतर कर पाती है, जो विश्लेषकों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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