Tejas Networks और C-DoT ने BSNL के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि उनके स्वदेशी उपकरण खराब परफॉर्म कर रहे हैं। इस विवाद से 4G रोलआउट की गति पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है, जिस पर 16 अक्टूबर के तिमाही नतीजों के दौरान निवेशकों की नजर रहेगी।
सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने हाल ही में टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) से क्वालिटी कंप्लायंस टाइमलाइन में ढील देने की मांग की है। BSNL का तर्क है कि स्वदेशी तकनीक पर अनिवार्य निर्भरता के कारण नेटवर्क परफॉर्मेंस पर असर पड़ रहा है और उन्हें निजी कंपनियों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कंपनियों का पलटवार
इस पर Tejas Networks और C-DoT ने साफ किया है कि उनका हार्डवेयर 3GPP के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पूरी तरह पालन करता है। कंपनियों का दावा है कि उनके उत्पाद रेगुलेटर द्वारा तय किए गए बेंचमार्क को पूरा करते हैं, और BSNL द्वारा बताए गए प्रदर्शन में कमी के लिए स्वदेशी समाधान जिम्मेदार नहीं हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम क्यों है?
BSNL का 4G रोलआउट प्रोजेक्ट Tejas Networks के लिए बेहद अहम है। कंपनी ने अगस्त 2026 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से ₹1,537 करोड़ का ऑर्डर हासिल किया था, जिसके तहत 18,000 से ज्यादा साइट्स पर उपकरण सप्लाई किए जाने हैं। इस विवाद के कारण काम की रफ्तार धीमी हो सकती है और भविष्य के ऑर्डर्स पर भी अनिश्चितता के बादल छा सकते हैं।
फाइनेंशियल सेहत पर दबाव
वित्तीय स्थिति की बात करें तो, Tejas Networks ने फिस्कल ईयर 2027 की पहली तिमाही में ₹202 करोड़ का नेट लॉस दर्ज किया था। जून 2026 तक कंपनी का नेट डेट (कर्ज) लगभग ₹4,277 करोड़ था। सरकारी प्रोजेक्ट्स में वर्किंग कैपिटल का बड़ा हिस्सा इन्वेंट्री में फंस जाता है, इसलिए BSNL के साथ बेहतर तालमेल कंपनी के कैश फ्लो के लिए बेहद जरूरी है। अब बाजार की नजरें 16 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं, जहां मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के स्टेटस और कर्ज कम करने की रणनीति पर क्या कहता है, यह देखना अहम होगा।
