Tata Communications: रेवेन्यू में उछाल, पर मार्जिन पर दबाव! ब्रोकरेज ने क्यों घटाए टारगेट?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Tata Communications: रेवेन्यू में उछाल, पर मार्जिन पर दबाव! ब्रोकरेज ने क्यों घटाए टारगेट?
Overview

Tata Communications के तिमाही नतीजों ने शेयर बाजार में मिली-जुली प्रतिक्रिया दिखाई है। कंपनी का रेवेन्यू तो **9.4%** बढ़कर **₹6,554 करोड़** हो गया, लेकिन मार्जिन पर दबाव और मुनाफे में भारी गिरावट ने एनालिस्ट्स को इसके टारगेट प्राइस (Target Price) घटाने पर मजबूर कर दिया है।

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रेवेन्यू ग्रोथ पर मार्जिन का दबाव?

Tata Communications के चौथे क्वार्टर, फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजे इस बार कुछ मिले-जुले संकेत दे रहे हैं। एक तरफ जहां कंपनी का रेवेन्यू, खासकर डिजिटल पोर्टफोलियो में, तेजी से बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ मुनाफे (Net Profit) में आई भारी गिरावट और मार्जिन पर पड़ते दबाव ने एनालिस्ट्स की चिंता बढ़ा दी है।

टॉप-लाइन चमका, बॉटम-लाइन पर सवाल

कंपनी का ग्रॉस रेवेन्यू साल-दर-साल 9.4% बढ़कर ₹6,554 करोड़ पर पहुंच गया। इसमें डेटा सर्विसेज रेवेन्यू 11.5% बढ़कर ₹5,684 करोड़ रहा, और डिजिटल पोर्टफोलियो में तो 19.2% की शानदार 19.2% की उछाल देखी गई, जो ₹2,909 करोड़ तक पहुंच गया। EBITDA मार्जिन भी 86 बेसिस पॉइंट सुधरकर 19.6% रहा।

लेकिन, इन सबके बीच, नेट प्रॉफिट में 75% की भारी साल-दर-साल गिरावट आई, जो ₹263 करोड़ रहा। यह गिरावट मुख्य रूप से पिछले साल के मुकाबले असाधारण लाभ (exceptional gains) के न होने के कारण है। नतीजों के बावजूद, 23 अप्रैल 2026 को शेयर 5.06% चढ़कर ₹1,604 पर बंद हुआ, जो निवेशकों के रेवेन्यू ग्रोथ और डिजिटल एक्सपेंशन पर फोकस को दर्शाता है। हालांकि, EBITDA में सुधार के लिए कंपनी का करेंसी पर निर्भर होना एक चिंता का विषय बना हुआ है।

वैल्यूएशन और सेक्टर का हाल

Tata Communications का P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) लगभग 28-29x है, जो एशियाई टेलीकॉम इंडस्ट्री के औसत 16.1x और इसके पीयर (Peer) एवरेज 26.1x से ज्यादा है। वहीं, Indus Towers जैसे प्रतिद्वंद्वी 11.5x पर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि Bharti Airtel 30-37x की रेंज में है।

भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में Reliance Jio और Bharti Airtel सब्सक्राइबर बढ़ा रहे हैं, जबकि Vodafone Idea को नुकसान हो रहा है। Tata Communications इस बदलते बाजार में एंटरप्राइज डिजिटल सॉल्यूशंस पर फोकस कर रही है। कंपनी ने FY28 तक ₹28,000 करोड़ का डेटा रेवेन्यू टारगेट दोहराया है, लेकिन इसे FY27 से आगे बढ़ा दिया गया है, जो हालिया अधिग्रहणों (acquisitions) के बाद इंटीग्रेशन की जरूरत को दर्शाता है।

एनालिस्ट्स की चिंताएं और टारगेट कट

अच्छे रेवेन्यू आंकड़ों और 'Buy' रेटिंग के बावजूद, एनालिस्ट्स कुछ चिंताओं को लेकर सतर्क हैं। Nuvama ने कहा कि "मार्जिन का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है।" कंपनी का EBITDA मार्जिन अस्थिर रहा है, और डेटा EBITDA मार्जिन साल-दर-साल गिरा है।

दो बड़े ब्रोकरेज फर्मों ने टारगेट प्राइस भी घटाए हैं: ICICI Securities ने इसे ₹2,250 से घटाकर ₹2,100 किया है, और Nuvama ने ₹2,100 से घटाकर ₹2,000 कर दिया है। यह दर्शाता है कि लंबी अवधि की क्षमता को स्वीकार करने के बावजूद, निकट अवधि की चुनौतियां स्टॉक की चाल को सीमित कर सकती हैं। नेट प्रॉफिट में 75% की गिरावट और अधिग्रहणों के बाद नेट डेट (Net Debt) में तिमाही-दर-तिमाही वृद्धि भी चिंताएं बढ़ा रही हैं।

आगे की राह: टारगेट और सेंटीमेंट

कंपनी मैनेजमेंट जल्द ही अपनी मीडियम-टर्म स्ट्रेटेजी और आउटलुक पर और जानकारी देने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स का सेंटीमेंट काफी हद तक पॉजिटिव बना हुआ है, जिसमें 'Buy' की कंसेंसस रेटिंग और औसतन ₹1,928 का 12-महीने का टारगेट प्राइस है। हालांकि, ICICI Securities और Nuvama के स्पेसिफिक टारगेट, ₹2,100 और ₹2,000 क्रमशः, यह बताते हैं कि मार्जिन और लागत प्रबंधन आगे चलकर महत्वपूर्ण रहेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.