Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने सितंबर 2026 के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिसके तहत टेलीकॉम ऑपरेटरों को स्पैम रोकने के लिए AI का उपयोग करना अनिवार्य होगा।
अब AI करेगा स्पैम कॉल्स की पहचान
TRAI ने 'Telecom Commercial Communications Customer Preference (Third Amendment) Regulations, 2026' के तहत अपनी रणनीति बदल दी है। अब तक स्पैम की पहचान ग्राहकों की शिकायतों पर टिकी थी, लेकिन अब ऑपरेटरों को अनिवार्य रूप से AI और मशीन लर्निंग का उपयोग करना होगा। यदि 10 दिनों के भीतर एक ही सेंडर के 5 या अधिक नंबर्स स्पैम पाए जाते हैं, तो ऑपरेटर को कार्रवाई करनी होगी। इसमें सेंडर का KYC दोबारा वेरिफिकेशन, 15 दिनों तक आउटगोइंग सेवा बंद करना या हमेशा के लिए कनेक्शन काटना शामिल है।
जरूरी सर्विस कॉल्स को मिलेगी राहत
नियमों में यह साफ किया गया है कि 140xx, 1600xx, और 1601xx सीरीज के नंबर्स को अब थर्ड-पार्टी ऐप्स ब्लॉक या स्पैम टैग नहीं कर पाएंगे। ये नंबर्स बैंकिंग और ट्रांजैक्शनल अलर्ट्स के लिए सुरक्षित रहेंगे। कंपनियों को अब अपने नंबर्स को DLT प्लेटफॉर्म पर रजिस्टर करना होगा, ताकि जरूरी मैसेज ग्राहकों तक बिना किसी रुकावट के पहुंच सकें।
कंपनियों और निवेशकों के लिए क्या हैं चुनौतियां?
ये नए बदलाव टेलीकॉम कंपनियों के लिए अतिरिक्त खर्च लेकर आए हैं, क्योंकि उन्हें अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को AI से लैस करना होगा। वहीं, बिजनस के लिए DLT रजिस्ट्रेशन और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रक्रिया और जटिल हो सकती है। TRAI अब मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के साथ मिलकर थर्ड-पार्टी ऐप्स पर सीधे नियंत्रण की कोशिश कर रहा है। निवेशकों को यह देखना होगा कि टेलीकॉम कंपनियां इस बदलाव को कितनी तेजी से अपनाती हैं और क्या इससे सर्विसेज में कोई अस्थायी रुकावट आती है या नहीं।
