TRAI ने स्पैम कॉल्स पर शिकंजा कसते हुए नए सख्त नियम जारी किए हैं। अब किसी भी कमर्शियल कॉल के लिए कस्टमर की सहमति केवल 7 दिनों के लिए ही मान्य होगी, जिसका असर सीधे तौर पर टेलीमार्केटिंग करने वाली कंपनियों और टेलीकॉम ऑपरेटरों पर पड़ेगा।
नियम में बड़ा बदलाव
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने स्पैम कॉल्स को रोकने के लिए अपने नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब कंपनियों के लिए किसी भी प्रमोशनल या कमर्शियल कॉल से पहले कस्टमर से सत्यापन योग्य सहमति लेना अनिवार्य होगा। सबसे बड़ा बदलाव सहमति की अवधि में किया गया है, जो अब मात्र 7 दिन के लिए ही सीमित होगी। इसका मतलब है कि एक बार की सहमति के बाद कंपनियां केवल एक हफ्ते तक ही फॉलो-अप कर सकेंगी, जिसके बाद उन्हें फिर से अनुमति लेनी होगी।
टेलीकॉम कंपनियों पर बढ़ेगा दबाव
इस नए बदलाव का सीधा असर Bharti Airtel, Reliance Jio और Vodafone Idea जैसी कंपनियों पर पड़ना तय है। TRAI ने इन ऑपरेटरों को AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ML (मशीन लर्निंग) आधारित स्पैम डिटेक्शन सिस्टम तैनात करने का आदेश दिया है ताकि स्पैम कॉल्स की पहचान की जा सके। साथ ही, नेटवर्क के बीच डेटा साझा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि स्पैमर्स एक ऑपरेटर से दूसरे पर न जा सकें।
क्या है जुर्माना?
नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर कोई कंपनी बिना रजिस्ट्रेशन के ऑटोमेटेड कॉल या रॉबो-कॉल करती है, तो उस पर प्रति मिनट 5 पैसे तक का टर्मिनेशन चार्ज लगाया जाएगा। बार-बार नियम तोड़ने पर संबंधित नंबरों को पूरी तरह से डिस्कनेक्ट किया जा सकता है और संबंधित बिजनेस का फिजिकल वेरिफिकेशन भी हो सकता है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी होगी जो मास टेली-कॉलिंग या लीड जनरेशन पर निर्भर हैं, क्योंकि उनका ऑपरेशनल खर्च बढ़ सकता है। हालांकि, यह कदम टेलीकॉम इकोसिस्टम को साफ-सुथरा बनाने के लिए उठाया गया है, जिससे भविष्य में नेटवर्क क्वालिटी और कंज्यूमर ट्रस्ट में सुधार की उम्मीद है।
