Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने टेलीकॉम कंपनियों को अपने AI-बेस्ड नेटवर्क सिस्टम में सख्त 'ह्यूमन ओवरसाइट' और ऑडिट प्रोटोकॉल लागू करने का निर्देश दिया है। यह कदम डिजिटल स्कैम रोकने और सिस्टम की खामियों को दूर करने के लिए उठाया गया है।
TRAI चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने नई दिल्ली में आयोजित CO.AI 2026 इवेंट के दौरान टेलीकॉम सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट रेगुलेटरी अपेक्षाएं रखी हैं। उन्होंने जोर दिया है कि हालांकि ऑपरेटर नेटवर्क मैनेज करने और फ्रॉड डिटेक्शन के लिए AI का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इस तकनीक के साथ जवाबदेही (Accountability) अनिवार्य होनी चाहिए। रेगुलेटर ऐसी व्यवस्था चाहता है जहाँ ऑटोमेटेड फैसलों में मानवीय हस्तक्षेप हो और ऑडिट के लिए विस्तृत लॉग मेंटेन किए जाएं।
ऑपरेशंस और अनुपालन पर असर (Operational & Compliance Impact)
Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसी बड़ी टेलीकॉम कंपनियां नेटवर्क एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए पहले से ही AI टूल्स का इस्तेमाल कर रही हैं। हालांकि, रेगुलेटर की चेतावनी संकेत देती है कि पूरी तरह से ऑटोनॉमस नेटवर्क सुरक्षा के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकते हैं। अगर कोई ऑटोमेटेड सिस्टम बिना निगरानी के गलती करता है, तो करोड़ों यूजर्स की सर्विस ठप होने का खतरा है।
निवेशकों के लिए मुख्य चिंता 'टेक्नोलॉजी इनोवेशन' और 'रेगुलेटरी खर्च' के बीच का तालमेल है। कड़े नियमों और ह्यूमन-इन-द-लूप सुरक्षा उपायों को लागू करने से कंपनियों का ऑपरेशनल खर्च बढ़ सकता है। अगर TRAI आगे चलकर कड़े नियम बनाता है, तो कंपनियों को अपने सिस्टम को अपडेट करने के लिए अतिरिक्त निवेश करना होगा।
इसके अलावा, TRAI चीफ ने डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए टेलीकॉम ऑपरेटरों और वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की अपील की है। आने वाले समय में कंपनियों को अधिक डेटा शेयरिंग या सख्त आइडेंटिटी वेरिफिकेशन प्रोटोकॉल अपनाने पड़ सकते हैं, जिसका असर कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने की संभावना है।
