5G 'Fast Lane' पर TRAI की नई लगाम: आम यूजर्स की स्पीड पर असर रोकने के लिए ड्राफ्ट रूल्स जारी

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
5G 'Fast Lane' पर TRAI की नई लगाम: आम यूजर्स की स्पीड पर असर रोकने के लिए ड्राफ्ट रूल्स जारी

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने बड़ा कदम उठाते हुए ड्राफ्ट रूल्स जारी किए हैं। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि टेलीकॉम कंपनियां 5G 'फास्ट लेन' की आड़ में आम ग्राहकों की इंटरनेट स्पीड को धीमा न कर सकें। नेटवर्क स्लाइसिंग जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों, जैसे कि Bharti Airtel, को सभी के लिए सर्विस क्वालिटी बनाए रखने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज़्यादा खर्च करना पड़ सकता है।

80% कैपेसिटी का नियम

TRAI के नए प्रस्ताव का एक अहम हिस्सा नेटवर्क कंजेशन (Network Congestion) पर केंद्रित है। प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई मोबाइल सेल टावर महीने में लगातार पांच दिन पीक आवर्स (Peak Hours) के दौरान अपनी 80% क्षमता से ज़्यादा इस्तेमाल होता है, तो ऑपरेटर को तुरंत इसकी क्षमता बढ़ानी होगी। यदि ऑपरेटर 30 दिनों के अंदर टेक्निकल अपग्रेड (Technical Upgrade) या ज़्यादा स्पेक्ट्रम (Spectrum) जोड़कर इस लोड को 80% से नीचे नहीं ला पाता है, तो उसे उस खास सेल पर नेटवर्क स्लाइसिंग (Network Slicing) की सेवाएं बंद करनी होंगी।

निवेशकों के लिए, यह प्रस्ताव प्रीमियम सर्विस (Premium Service) देने और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च के बीच सीधा संबंध स्थापित करता है। टेलीकॉम ऑपरेटर्स अब केवल प्रीमियम यूजर्स को कैपेसिटी शिफ्ट करके खराब अनुभव के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते। इसके बजाय, उन्हें दोनों सेगमेंट्स को बिना सर्विस क्वालिटी से समझौता किए पूरा करने के लिए अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने में ज़्यादा निवेश करना होगा।

बिजनेस मॉडल पर असर

Bharti Airtel जैसी कंपनियां पोस्टपेड ग्राहकों के लिए अपने 'फास्टलेन' प्लान जैसी विशेष सेवाएं देने के लिए नेटवर्क स्लाइसिंग का इस्तेमाल कर रही हैं। यह टेक्नोलॉजी इन यूजर्स के लिए एक डेडिकेटेड, हाई-स्पीड लेन बनाती है। जहां यह कंपनी के लिए ग्रोथ का जरिया रहा है और पोस्टपेड सब्सक्राइबर बढ़ाने में मदद की है, वहीं नए ड्राफ्ट रूल्स से रेगुलेटरी जांच (Regulatory Scrutiny) बढ़ेगी।

Bharti Airtel पहले कह चुकी है कि नेटवर्क स्लाइसिंग से ओवरऑल नेटवर्क कैपेसिटी बढ़ती है, लेकिन नए नियम कैपेसिटी मैनेजमेंट के लिए एक ज़्यादा सख़्त तरीका अपनाएंगे। कंपनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रीमियम अनुभव देने की उसकी कोशिश नए क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (Quality Standards) के खिलाफ न जाए, जिससे ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Cost) बढ़ सकती है या ज़्यादा कंजेशन वाले इलाकों में इन सेवाओं के रोलआउट (Rollout) पर सीमा लग सकती है।

सर्विस क्वालिटी का व्यापक ओवरहॉल

5G ट्रैफिक से परे, TRAI भारत में टेलीकॉम सर्विस क्वालिटी (Service Quality) को मापने के तरीके में एक व्यापक बदलाव की योजना बना रहा है। प्रस्ताव में ऑपरेटर्स के लिए टेक्नोलॉजी-स्पेसिफिक कवरेज मैप (Coverage Map) पब्लिश करने की आवश्यकता शामिल है, जो इलाकों को एक्सीलेंट (Excellent), गुड (Good), फेयर (Fair) या नो कवरेज (No Coverage) के रूप में वर्गीकृत करेगा।

इसके अलावा, रेगुलेटर एक नया क्वालिटी ऑफ एक्सपीरियंस स्कोर (Quality of Experience Score - QoES) पेश करने का इरादा रखता है, जो टेक्निकल डेटा को कस्टमर फीडबैक के साथ जोड़ेगा। साथ ही, TRAI बिलिंग और डेटा चार्जेज (Data Charges) से संबंधित कस्टमर कंप्लेट्स (Customer Complaints) को हल करने की समय-सीमा चार हफ्तों से घटाकर एक हफ्ते करना चाहता है। रेगुलेटर ड्रॉप कॉल्स (Dropped Calls) को बेहतर ढंग से ट्रैक करने के लिए 'साइलेंस कॉल रेट' (Silence Call Rate) मेट्रिक भी पेश कर रहा है। निवेशकों को इन प्रस्तावों पर इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि अंतिम रेगुलेशन आने वाले क्वार्टर्स में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट की ज़रूरतों को तय कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.