TRAI ने स्पैम कॉल्स को रोकने के लिए एआई (AI) आधारित फिल्टर्स अनिवार्य कर दिए हैं। अब अनरजिस्टर्ड ऑटोमेटेड कॉल्स पर **5 पैसे प्रति मिनट** का चार्ज लगेगा, जिसका सीधा असर बल्क मैसेजिंग और ए2पी (A2P) सेवाओं का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों पर पड़ेगा।
एआई (AI) से होगा स्पैम का खात्मा
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने अपने रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में बड़ा बदलाव करते हुए अब सभी टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत में तेजी से बढ़ रहे फर्जी ऑटोमेटेड कॉल्स और स्पैम मैसेजिंग पर लगाम लगाना है। नए नियमों के तहत, एप्लिकेशन-टू-पर्सन (A2P) ट्रैफिक, जिसमें रोबोकॉल्स और सॉफ्टवेयर-जनरेटेड आउटरीच शामिल हैं, उन्हें अब टेलीकॉम प्रोवाइडर्स के पास पहले से रजिस्टर्ड कराना होगा।
अब जेब पर होगा असर
रेगुलेटर ने इस पूरी व्यवस्था को सख्त बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। जो A2P ट्रैफिक अनरजिस्टर्ड होगा, उस पर अब 5 पैसे प्रति मिनट का टर्मिनेशन चार्ज लगाया जाएगा। इस कदम से उन कंपनियों पर सीधा दबाव बढ़ेगा जो बिना सही प्रोटोकॉल के बल्क में मैसेजिंग करती हैं। इसके अलावा, अब क्रॉस-इंडस्ट्री ब्लैकलिस्टिंग की सुविधा शुरू होगी। यानी अगर कोई सेंडर एक नेटवर्क पर संदिग्ध पाया जाता है, तो उसकी जानकारी अन्य टेलीकॉम ऑपरेटर्स के साथ भी साझा की जाएगी, जिससे स्पैमर्स के लिए अपना काम जारी रखना मुश्किल हो जाएगा।
टेलीकॉम कंपनियों पर निवेश का दबाव
Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसे बड़े प्लेयर्स को अब अपनी नेटवर्क इंटेलिजेंस को अपग्रेड करने के लिए तुरंत निवेश करना होगा। हालांकि, शुरुआती दौर में कंप्लायंस की लागत बढ़ सकती है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में इससे नेटवर्क क्वालिटी और ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा। यह नियम उन ट्रांजेक्शनल मैसेज (जैसे OTP) के लिए बाधा नहीं बनेगा, जिन्हें बैंक या लॉजिस्टिक कंपनियां अपने ग्राहकों तक सही समय पर पहुंचाती हैं।
अब बिजनेस के लिए केवाईसी (KYC) और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो गई है। निवेशकों को सलाह है कि वे इस नए नियम के लागू होने की समयसीमा और कंपनियों के बढ़ते ऑपरेशनल खर्च पर बारीकी से नजर रखें।
