Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) ने 'Network Anubhav' डैशबोर्ड लॉन्च किया है, जो मोबाइल और ब्रॉडबैंड की क्वालिटी पर नजर रखेगा। क्राउड-सोर्स्ड डेटा के जरिए आने वाली यह पारदर्शिता टेलीकॉम ऑपरेटरों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च बढ़ाने का दबाव पैदा कर सकती है।
क्या है यह 'Network Anubhav' डैशबोर्ड?
TRAI ने 4 नवंबर, 2026 को इस नए डिजिटल टूल की शुरुआत की है। यह एक जियो-स्पेशियल डैशबोर्ड है, जो देश भर में मोबाइल और ब्रॉडबैंड सेवाओं की असल स्थिति को सामने रखेगा। इसका मुख्य मकसद कॉल की क्वालिटी और इंटरनेट डाउनलोड स्पीड जैसे अहम पैमानों पर डेटा-आधारित पारदर्शिता लाना है।
कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
यह डैशबोर्ड मुख्य रूप से दो स्रोतों से डेटा उठाएगा: रेगुलेटर के अपने 'MySpeed' और 'MyCall' ऐप्स से, और साथ ही TRAI द्वारा किए गए इंडिपेंडेंट ड्राइव टेस्ट से। डेटा को P50, P80 और P90 पर्सेंटाइल में बांटा गया है, जिससे यह साफ पता चलेगा कि नेटवर्क की सर्विस किस क्षेत्र में कितनी खराब या अच्छी है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
अब तक टेलीकॉम कंपनियां अक्सर राष्ट्रीय औसत (National Average) का हवाला देकर अपनी नेटवर्क क्वालिटी का बचाव करती थीं। लेकिन इस नए डैशबोर्ड के आने के बाद, अब 'डेड जोन' और खराब नेटवर्क वाले इलाकों का डेटा सार्वजनिक होगा। इससे कंपनियों को उन विशिष्ट क्षेत्रों में अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने और कैपेसिटी अपग्रेड करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
रेगुलेटरी रिस्क और आगे की राह
यह कदम भविष्य में सख्त रेगुलेटरी कार्रवाई की नींव रख सकता है। यदि डैशबोर्ड पर किसी ऑपरेटर का परफॉर्मेंस लगातार खराब दिखता है, तो सरकार उनसे मेंटेनेंस और निवेश को लेकर सवाल-जवाब कर सकती है। निवेशकों को आने वाले समय में कंपनियों के मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी होगी, क्योंकि नेटवर्क सुधारने के लिए होने वाला अतिरिक्त खर्च उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।
