केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का सपना है कि हर स्मार्टफोन बैंक की ब्रांच बने, लेकिन बढ़ती कीमतों ने इस रफ्तार को रोक दिया है। स्मार्टफोन रिटेल प्राइस में **21%** की बढ़ोतरी से बिक्री **30-50%** तक गिर गई है, जिससे पूरा सेक्टर अब फाइनेंसिंग पर निर्भर हो गया है।
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत के लिए एक डिजिटल भविष्य की परिकल्पना की है, जहां स्मार्टफोन और टेलीकॉम नेटवर्क पारंपरिक बैंक शाखाओं की जगह ले लेंगे। सरकार की यह योजना सस्ते मोबाइल डेटा का उपयोग करके फोन को क्रेडिट, निवेश और फाइनेंशियल सर्विसेज का गेटवे बनाने की है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए सरकार हर नागरिक तक बैंकिंग पहुंचाना चाहती है, लेकिन यह डिजिटल पुश फिलहाल हार्डवेयर मार्केट की चुनौतियों में फंस गया है।
क्यों महंगी हुई जेब?
सरकार का कहना है कि भारत में 1 GB डेटा की कीमत करीब ₹9 है, लेकिन इसे एक्सेस करने के लिए जरूरी डिवाइस की कीमतें आसमान छू रही हैं। साल 2026 में स्मार्टफोन की रिटेल कीमतों में 21% की बढ़ोतरी हुई है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। यह इजाफा मुख्य रूप से DRAM और NAND जैसे मेमोरी कंपोनेंट की बढ़ती लागत के कारण हुआ है, जिससे ₹15,000 से कम कीमत वाले बजट स्मार्टफोन्स की बिक्री पर बुरा असर पड़ा है।
रिटेल मार्केट में मंदी का दौर
ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त के दूसरे पखवाड़े में मेनलाइन स्टोर की बिक्री में 30-40% की गिरावट आई, जो सितंबर की शुरुआत से बढ़कर 40-50% तक पहुंच गई है। दुकानदारों के लिए ग्राहकों की घटती संख्या बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि लोग पुराने फोन बदलने में देरी कर रहे हैं।
फाइनेंसिंग पर बढ़ती निर्भरता
इस संकट से निपटने के लिए कंपनियां अब फाइनेंसिंग मॉडल का सहारा ले रही हैं। अनुमान है कि 2026 में कुल स्मार्टफोन बिक्री का 42% हिस्सा NBFCs और EMI प्लान्स के जरिए होगा। हालांकि यह बिक्री को रफ्तार दे रहा है, लेकिन कंज्यूमर गुड्स के लिए कर्ज पर यह निर्भरता भविष्य में आर्थिक जोखिम पैदा कर सकती है।
