Reliance Jio ने अपने पहले सैटेलाइट टेस्ट फ्लाइट के लिए सितंबर 2027 की तारीख तय कर दी है। कंपनी 2028 तक **1,600** सैटेलाइट्स का अपना ब्रॉडबैंड नेटवर्क तैयार करने की तैयारी में है, जो ग्लोबल ऑपरेटर्स को सीधी चुनौती देगा।
Reliance Jio ने लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट के पहले टेस्ट फ्लाइट के लिए सितंबर 2027 का लक्ष्य रखा है। यह ट्रायल कंपनी के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की क्षमता को परखने के लिए अहम होगा, ताकि भविष्य में 1,600 सैटेलाइट्स का पूरा जाल बिछाया जा सके। कंपनी का लक्ष्य 2028 की शुरुआत में भारत के दूर-दराज इलाकों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करना है।
सरकारी मंजूरी और तकनीक
इस प्रोजेक्ट को IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorisation Centre) से तकनीकी मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही, कंपनी ने International Telecommunications Union (ITU) के पास रेडियो फ्रीक्वेंसी और ऑर्बिटल स्लॉट्स के लिए आवेदन कर दिया है। ये सैटेलाइट्स 650 किमी की ऊंचाई पर तैनात किए जाएंगे, ताकि स्पेस में भीड़भाड़ से बचा जा सके।
निवेश का बड़ा दांव और IPO
यह सैटेलाइट प्रोजेक्ट कंपनी के 6G और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) वाले बड़े टेक्नोलॉजी रोडमैप का हिस्सा है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट पर अगले कुछ वर्षों में $10 बिलियन से $15 बिलियन तक का भारी-भरकम खर्च हो सकता है। यही कारण है कि निवेशक अब Jio Platforms के आने वाले IPO पर बारीक नजर रख रहे हैं। ड्रॉफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, IPO से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कर्ज कम करने और ऐसी नई टेक्नोलॉजी में निवेश करने के लिए इस्तेमाल होगा।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियां
हालांकि यह प्रोजेक्ट Starlink और Amazon के Project Kuiper जैसी कंपनियों को सीधी टक्कर देगा, लेकिन राह आसान नहीं है। वैश्विक स्तर पर मौजूद इन कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा से मार्जिन पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा, रेगुलेटरी मंजूरियां, स्पेक्ट्रम का आवंटन और इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी लागत कंपनी के कैश फ्लो पर शॉर्ट से मीडियम टर्म में असर डाल सकती है। निवेशकों को टेस्ट फ्लाइट के नतीजों और IPO से जुड़ी अपडेट्स पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
