नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सुझाव दिया है कि **$145 बिलियन** के यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन (USO) फंड का उपयोग घरेलू टेलिकॉम ऑपरेटरों को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए। इसका मकसद Elon Musk की Starlink जैसी ग्लोबल कंपनियों से मिलने वाली चुनौती का मुकाबला करना है।
घरेलू कंपनियों को मिलेगी रफ्तार
राजीव कुमार का मानना है कि यदि सरकार इस फंड का सही इस्तेमाल करे, तो Bharti Airtel और Reliance Jio जैसी दिग्गज कंपनियां स्पेस-बेस्ड कम्युनिकेशन नेटवर्क को तेजी से खड़ा कर सकती हैं। यह कदम न केवल विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि देश में एक मजबूत घरेलू विकल्प भी तैयार करेगा।
क्या है मौजूदा स्थिति?
देश में इस समय सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर बड़ी चर्चा है। Starlink, Jio Satellite Communications और Eutelsat OneWeb जैसी कंपनियां लाइसेंस और सिक्योरिटी क्लीयरेंस की प्रक्रिया से गुजर रही हैं। संचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा जांच का पैमाना सभी आवेदकों के लिए एक समान है।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को यह समझना होगा कि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेक्टर का भविष्य काफी हद तक स्पेक्ट्रम आवंटन और सरकारी गाइडलाइंस पर टिका है। हालांकि Bharti Airtel और Reliance Jio के पास पहले से ही GMPCS लाइसेंस मौजूद हैं, लेकिन डेटा प्रोटेक्शन और सिक्योरिटी नियमों के कारण कमर्शियल रोलआउट में समय लग सकता है।
आने वाले समय में मार्केट एक्सपर्ट्स इस बात पर नजर रखेंगे कि टेलिकॉम कंपनियों का ARPU (Average Revenue Per User) और उनका कैपिटल एक्सपेंडिचर इस नई तकनीक के साथ कैसे बदलता है।
