10वें India Mobile Congress में PM Narendra Modi ने ग्लोबल लीडर्स और टेलीकॉम ऑपरेटर्स से साइबर अपराधों के खिलाफ एक साथ आने का आह्वान किया है। सरकार का फोकस अब देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को सुरक्षित बनाने पर है।
ग्लोबल लेवल पर नकेल
8 अक्टूबर, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 10वें India Mobile Congress (IMC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल इकॉनमी की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया। पीएम ने टेलीकॉम ऑपरेटर्स, वित्तीय संस्थानों और सरकारों से एक ऐसा ग्लोबल मैकेनिज्म तैयार करने को कहा है, जिससे फ्रॉड कॉल और मैसेज को उनके सोर्स पर ही ब्लॉक किया जा सके। भारत का लक्ष्य 2030 तक 1 अरब (1 Billion) 5G यूजर्स तक पहुंचना है, और इसे सुरक्षित बनाना अब सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है।
टेलीकॉम कंपनियों पर क्या असर?
देश में अब 5 लाख से ज्यादा बेस स्टेशन एक्टिव हैं और 5G सर्विसेज का जाल हर जिले तक बिछ चुका है। अब सरकार का जोर 'सॉवरेन कंट्रोल' और डेटा सिक्योरिटी पर है। टेलीकॉम और डिजिटल सर्विसेज सेक्टर के लिए यह बदलाव बड़े निवेश की मांग कर सकता है। कंपनियों को अपने नेटवर्क इंटेलिजेंस और AI-आधारित मॉनिटरिंग टूल्स को अपग्रेड करना होगा, जिससे तकनीकी खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है।
चुनौतियां और अवसर
सरकार 'Gati Shakti Sanchar' पोर्टल के जरिए रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को तो आसान बना रही है, लेकिन ग्लोबल लेवल पर साइबर अपराधों को रोकना एक जटिल प्रक्रिया है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि कंपनियां सुरक्षा मानकों को पूरा करते हुए अपनी ऑपरेटिंग एफिशिएंसी को कैसे बनाए रखती हैं। आने वाले समय में GSMA जैसे वैश्विक निकायों की प्रतिक्रिया और सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले नए रेगुलेटरी गाइडलाइंस इस सेक्टर की दिशा तय करेंगे।
