मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन पर आखिरकार मोबाइल कनेक्टिविटी की सेवाएं शुरू हो गई हैं। दो साल के लंबे विवाद को सुलझा लिया गया है, जिसके बाद Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea अब MMRCL के साथ मिलकर एक सस्ते शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल का इस्तेमाल करेंगे। इस फैसले से टेलीकॉम ऑपरेटर्स का मासिक किराया काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को बेहतर नेटवर्क मिलेगा।
क्या हुआ?
दो साल के लंबे इंतज़ार और विवाद के बाद, मुंबई मेट्रो एक्वा लाइन पर मोबाइल नेटवर्क सेवाएं फिर से शुरू हो रही हैं। इस विवाद की वजह से प्रमुख टेलीकॉम ऑपरेटर्स यात्रियों को लगातार कनेक्टिविटी नहीं दे पा रहे थे। Reliance Jio, Bharti Airtel, Vodafone Idea और मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MMRCL) के बीच आखिरकार समझौता हो गया है। ऑपरेटर्स को अब जरूरी राइट-ऑफ-वे (Right-of-Way) की मंजूरी मिल गई है, जिससे वे पिछले थर्ड-पार्टी कॉस्ट स्ट्रक्चर को बायपास करके एक कुशल, शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल की ओर बढ़ सकते हैं।
पैसों पर क्या असर?
टेलीकॉम ऑपरेटर्स के लिए यह समझौता इंफ्रास्ट्रक्चर किराए के खर्चों में बड़ी राहत लेकर आया है। पुरानी व्यवस्था के तहत, ऑपरेटर्स को हर महीने लगभग ₹50-60 लाख का भारी किराया देना पड़ रहा था। नए समझौते के तहत, ऑपरेटर्स अब हर स्टेशन के लिए हर महीने लगभग ₹23,000 का एक मामूली राइट-ऑफ-वे शुल्क देंगे। इसके अलावा, स्टेशनों और सुरंगों में लगे उपकरणों के लिए ₹1 लाख प्रति माह का शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर शुल्क भी देना होगा। महंगे किराए से हटकर एक तय फीस स्ट्रक्चर पर आने से शहरी ट्रांजिट स्पेस में ऑपरेशनल खर्चों को मैनेज करने में काफी मदद मिलेगी।
ऑपरेशन कैसे होगा?
आगे चलकर, ऑपरेटर्स ACES India द्वारा मैनेज किए जा रहे एक शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल का उपयोग करेंगे। इससे नेटवर्क की डिप्लॉयमेंट और मेंटेनेंस ज्यादा कुशल तरीके से हो पाएगी। रोलआउट को मैनेज करने के लिए, 27 स्टेशनों को ऑपरेटर्स के बीच बराबर बांटा गया है, जिसमें हर किसी को नौ स्टेशनों की जिम्मेदारी दी गई है ताकि नेटवर्क मैनेजमेंट व्यवस्थित रहे। इस आपसी सहयोग से तकनीकी ओवरलैप को रोका जा सकेगा और रोज़ाना सफर करने वाले यात्रियों को बेहतर सर्विस मिलेगी।
फेजवाइज डिप्लॉयमेंट की स्थिति
हर टेलीकॉम कंपनी अलग-अलग स्टेज पर काम कर रही है। Vodafone Idea फिलहाल 16 स्टेशनों पर सक्रिय है, जो अरे जेडवीएल (Aarey JVLR) से आचार्य अत्रे चौक (Acharya Atre Chowk) तक का हिस्सा कवर करता है, और जल्द ही बाकी स्टेशनों तक विस्तार करने की योजना है। Bharti Airtel ने 10 स्टेशनों पर कवरेज की पुष्टि की है और अगले 60 दिनों में बाकी 17 स्टेशनों पर अपना काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है। Reliance Jio, अपनी शुरुआती सर्वे पूरा करने के बाद, अब पूरे कॉरिडोर पर फुल डिप्लॉयमेंट की तैयारी कर रहा है, और जुलाई के मध्य तक पूरी कवरेज हासिल करने का लक्ष्य रखा है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
हालांकि यह विशेष समाधान प्रमुख टेलीकॉम प्लेयर्स के लिए ऑपरेशनल एफिशिएंसी में मामूली सुधार लाता है, लेकिन यह पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में रेगुलेटरी क्लैरिटी के व्यापक महत्व को उजागर करता है। निवेशक इन कंपनियों पर नज़र रख सकते हैं कि वे घने शहरी वातावरण में नेटवर्क कवरेज का विस्तार करते हुए अपने कैपिटल स्पेंडिंग और ऑपरेटिंग कॉस्ट को कैसे मैनेज करती हैं। मुख्य बात यह होगी कि पूरे कॉरिडोर पर फुल डिप्लॉयमेंट कितनी तेजी से होता है और क्या यह सहयोगी मॉडल भारत के अन्य शहरों में भविष्य के मेट्रो प्रोजेक्ट्स के लिए एक रेप्लिकेबल स्ट्रेटेजी साबित होता है।
