सरकारी टेलीकॉम कंपनी MTNL पर साल 2026 तक **₹40,008** करोड़ का भारी कर्ज़ चढ़ने का अनुमान है। हालांकि, कंपनी ऑपरेशनल तौर पर मुनाफे में आ गई है, लेकिन सरकार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल कर्ज़ को रीस्ट्रक्चर करने की कोई नई योजना नहीं बनाई जा रही है।
Detailed Coverage
MTNL पर कर्ज़ का बोझ
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL) पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक कुल ₹40,008.52 करोड़ की देनदारी होने का अनुमान है। यह सरकारी टेलीकॉम ऑपरेटर, जो मुख्य रूप से दिल्ली और मुंबई में अपनी सेवाएं देती है, लगातार वित्तीय चुनौतियों से जूझ रही है।
ऑपरेशनल परफॉरमेंस और एसेट्स
भारी कर्ज़ के बावजूद, सरकार ने कंपनी के ऑपरेशनल सुधारों की ओर इशारा किया है। MTNL वित्तीय वर्ष 2020-21 से लगातार पॉजिटिव EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) दर्ज कर रही है। FY24 में ₹43 करोड़ का EBITDA बढ़कर FY25 में ₹195 करोड़ हो गया। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह आंकड़ा ₹437 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है।
कर्ज़ से निपटने के लिए, सरकार ने MTNL की नॉन-कोर एसेट्स (गैर-मुख्य संपत्ति) पर ज़ोर दिया है, जिनका बाज़ार मूल्य लगभग ₹50,000 करोड़ आंका गया है। कर्ज़ कम करने की भविष्य की सफलता काफी हद तक इन ज़मीन और प्रॉपर्टी की बिक्री से मिलेगी।
सरकारी मदद और ऑपरेशनल बदलाव
पिछले कुछ सालों में, केंद्र सरकार ने कंपनी को स्थिर करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसमें ₹24,071 करोड़ के सॉवरेन गारंटी बॉन्ड्स (SGBs) जारी करना शामिल है, ताकि महंगे कर्ज़ को बदला जा सके। इसके अलावा, ब्याज भुगतान के लिए ₹3,657.05 करोड़ का बजट अनुदान भी दिया गया। कंपनी को वॉलंटरी रिटायरमेंट स्कीम (VRS) के लिए ₹4,327 करोड़ भी मिले, जिसका उद्देश्य कर्मचारी लागत को कम करना था।
एक रणनीतिक कदम के तहत, MTNL की मुख्य ऑपरेशनल गतिविधियों का प्रबंधन अब भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) द्वारा एक सर्विस एग्रीमेंट के ज़रिए किया जा रहा है। इससे MTNL को अपनी एसेट्स का प्रबंधन करने और देनदारियों को चुकाने पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा।
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
हालांकि कंपनी ने ऑपरेशनल स्तर पर सुधार दिखाया है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल किसी भी नई रीस्ट्रक्चरिंग प्रस्ताव का मूल्यांकन नहीं कर रही है। निवेशकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि नॉन-कोर एसेट्स का मोनेटाइजेशन (पूंजीकरण) कितनी तेज़ी से और सफलतापूर्वक होता है। चूंकि कंपनी की भारी देनदारियों को चुकाने की क्षमता इन प्रॉपर्टी की बिक्री से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की देरी से उसकी वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है। निवेशक यह भी देखेंगे कि BSNL के साथ सर्विस एग्रीमेंट MTNL की लागत संरचना और अत्यधिक प्रतिस्पर्धी भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में उसकी दीर्घकालिक व्यवहार्यता को कैसे प्रभावित करता है।
