रेटिंग एजेंसी की गंभीर चिंताएं
India Ratings and Research (Ind-Ra) ने MTNL के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) को 'Rating Watch with Negative Implications' के तहत रखा है, जो कि सरकारी टेलीकॉम ऑपरेटर की वित्तीय स्थिरता को लेकर बड़े सवाल खड़े करता है।
खस्ताहाल वित्तीय हालात
MTNL का वित्तीय प्रदर्शन लगातार गिरता जा रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 (9MFY26) के पहले नौ महीनों में कंपनी का रेवेन्यू (revenue) पिछले साल की समान अवधि (9MFY25) के ₹8.2 अरब से घटकर केवल ₹5.5 अरब रह गया। इसकी मुख्य वजह टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते ग्राहकों की घटती संख्या है। हालात तब और बिगड़ गए जब ऑपरेटिंग लॉस (operating loss) में भारी इजाफा हुआ, जो 9MFY25 में ₹0.7 अरब था, वहीं 9MFY26 में यह बढ़कर ₹2.4 अरब हो गया। कंपनी का EBITDA मार्जिन भी बुरी तरह गिर गया, जो पिछले साल के -9.2% की तुलना में 9MFY26 में -44.1% तक पहुंच गया। इस सब के बीच, MTNL पर कुल कर्ज (gross debt) भी FY25 के अंत के ₹324.4 अरब से बढ़कर 9MFY26 तक ₹358.5 अरब तक पहुंच गया है।
निवेशकों के लिए बड़े जोखिम
MTNL कई गंभीर जोखिमों से जूझ रही है, जिन्होंने रेटिंग एजेंसियों और निवेशकों का ध्यान खींचा है:
- भारी वित्तीय कमजोरी: कंपनी का रेवेन्यू सालों से लगातार गिर रहा है और घाटा बढ़ता ही जा रहा है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी का कुल कर्ज ₹35,000 करोड़ से ज्यादा है।
- कर्ज चुकाने में डिफॉल्ट: भुगतान करने में असमर्थता के चलते कई बैंकों ने MTNL को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया है। इसके चलते कंपनी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं, और केवल विशेष बॉन्ड एस्क्रो अकाउंट (bond escrow account) में ही ट्रांजेक्शन की इजाजत है। यह भी पता चला है कि अगस्त 2024 से फरवरी 2025 के बीच कई सरकारी बैंकों को हजारों करोड़ के मूलधन और ब्याज का भुगतान करने में डिफॉल्ट हुआ है।
- फंडिंग में देरी और सरकारी गारंटी पर निर्भरता: कंपनी अक्सर डेट सर्विसिंग (debt servicing) की ड्यू डेट (due date) से पहले अपने ट्रस्ट और रिटेंशन अकाउंट (trust and retention account) को समय पर फंड करने में नाकाम रही है। ऐसे में ट्रस्टी को भारत सरकार (GoI) की गारंटी का सहारा लेना पड़ा है। हालांकि सरकार ने पिछली बार भुगतान किया है, लेकिन Ind-Ra इस बात की पुष्टि का इंतजार कर रही है कि भविष्य में इस स्ट्रक्चर्ड पेमेंट मैकेनिज्म (structured payment mechanism) का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा।
- ऑडिटर्स की चिंताएं: MTNL के ऑडिटर (auditors) ने क्वालिफाइड ओपिनियन (qualified opinion) जारी किया है, जो कंपनी के आंतरिक वित्तीय नियंत्रण (internal financial controls) को लेकर चेतावनी के संकेत देता है। संयुक्त सांविधिक ऑडिटर (joint statutory auditors) ने तो यहां तक कहा है कि कंपनी की नेट वर्थ (net worth) पूरी तरह खत्म हो चुकी है और चालू देनदारियां (current liabilities) चालू संपत्तियों (current assets) से काफी ज्यादा हैं, जिससे 'गोइंग कंसर्न' (going concern) के तौर पर कंपनी के चलने की क्षमता पर संदेह पैदा होता है।
- 'Incipient Sick PSE' का दर्जा: भारत सरकार लगातार MTNL को 'Incipient Sick PSE' (शुरुआती बीमार सरकारी उपक्रम) के रूप में वर्गीकृत कर रही है, जो इसकी नाजुक वित्तीय और परिचालन स्थिति को दर्शाता है।
पिछली समस्याएं
MTNL की वित्तीय परेशानियां नई नहीं हैं। पिछले एक दशक में कंपनी लगातार रेवेन्यू में गिरावट और ग्राहकों को खोने से जूझ रही है, क्योंकि यह Reliance Jio और Bharti Airtel जैसे प्राइवेट प्लेयर्स (private players) से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है। वित्तीय समस्याओं के अलावा, MTNL को नियामकीय जांच (regulatory scrutiny) का भी सामना करना पड़ा है। मार्च 2025 में, NSE और BSE दोनों ने बोर्ड संरचना और कमिटी स्ट्रक्चर्स (committee structures) के संबंध में SEBI के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स और डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) का पालन न करने पर कंपनी पर जुर्माना लगाया था, जो गवर्नेंस (governance) की कमजोरियों को उजागर करता है। कर्ज चुकाने और फंडिंग में लगातार देरी के मुद्दों के कारण रेटिंग एजेंसियों द्वारा अतीत में भी लगातार डाउनग्रेड (downgrade) या वॉच रखा गया है।
भविष्य का अनुमान (Outlook)
Ind-Ra का कहना है कि वह मुख्य घटनाक्रमों (key developments) पर नजर रखेगी और छह महीने के भीतर इस रेटिंग वॉच को हल करेगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या डेजिग्नेटेड अकाउंट (designated account) के लिए फंड की पुष्टि होती है, क्या यह अकाउंट चालू रहता है, और क्या स्ट्रक्चर्ड पेमेंट मैकेनिज्म का लगातार पालन होता है। फंडिंग में किसी भी और देरी का MTNL की क्रेडिट रेटिंग (credit rating) पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।
प्रतिस्पर्धियों से तुलना
MTNL भारतीय टेलीकॉम बाजार में काम करती है, जहां Reliance Jio और Bharti Airtel जैसे प्राइवेट प्लेयर्स का दबदबा है। Reliance Jio के 50 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर हैं और Airtel भी पीछे नहीं है। Vodafone-Idea (Vi) के पास भी अच्छी-खासी हिस्सेदारी है, हालांकि वह ग्राहकों को खो रही है। दूसरी सरकारी कंपनी Bharat Sanchar Nigam Limited (BSNL) MTNL की करीबी पीयर (peer) है, लेकिन BSNL के पास अधिक सब्सक्राइबर बेस है और मोबाइल सब्सक्राइबर में कुछ वृद्धि देखी गई है। इसके विपरीत, MTNL का वायरलाइन मार्केट शेयर (wireline market share) काफी कम हुआ है और वायरलेस सब्सक्राइबर बेस भी बहुत कम है, जिससे वह ग्राहकों को खो रही है। परिचालन संबंधी चुनौतियों को BSNL के साथ एक समझौते से और बढ़ाया गया है, जहां MTNL का रेवेन्यू रिकग्निशन (revenue recognition) प्रभावित होता है, जबकि खर्च अभी भी MTNL को ही उठाना पड़ता है - एक ऐसा मुद्दा जिस पर ऑडिटर ने चिंता जताई है।