Reliance Jio और Bharti Airtel अब अपने मोबाइल प्लान्स के साथ Perplexity Pro और Adobe जैसे प्रीमियम AI टूल्स फ्री दे रहे हैं। इस रणनीति का मकसद ग्राहकों को नेटवर्क से जोड़े रखना और चर्न (Churn) को कम करना है।
भारत की दिग्गज टेलीकॉम कंपनियां अब केवल डेटा और कॉलिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये खुद को डिजिटल इकोसिस्टम प्रोवाइडर के रूप में बदल रही हैं। Reliance Jio और Bharti Airtel अब अपने मोबाइल सब्सक्रिप्शन प्लान्स में सीधे प्रीमियम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स को शामिल कर रही हैं। कंपनियां Perplexity Pro, Google AI और Adobe Creative Cloud जैसे महंगे सॉफ्टवेयर का खर्च खुद उठाकर अपने यूजर्स को एक खास डिजिटल अनुभव दे रही हैं।\n\nइस नई रणनीति का सबसे बड़ा मकसद भारतीय टेलीकॉम मार्केट में 'चर्न रेट' (ग्राहकों के नेटवर्क छोड़ने की दर) को कंट्रोल करना है। महंगे सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन को मंथली प्लान में शामिल करके कंपनियां ग्राहकों को अपने नेटवर्क से लॉक-इन कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, Reliance Jio ने अपने प्रीमियम यूजर्स को 18 महीने तक के लिए AI सर्विसेज और 2TB क्लाउड स्टोरेज की सुविधा दी है। अगर कोई ग्राहक नेटवर्क बदलता है, तो वह इन प्रीमियम टूल्स का एक्सेस खो देगा।\n\nBharti Airtel भी इसी राह पर है। अपने 36 करोड़ ग्राहकों के लिए Perplexity Pro का एक साल का फ्री ऑफर देने के बाद कंपनी ने इसमें Adobe के प्रीमियम डिजाइन टूल्स भी जोड़े हैं। इस कदम से अडॉप्शन रेट में 640% का उछाल देखने को मिला है।\n\nहालांकि, निवेशकों के लिए यह एक दिलचस्प मोड़ है। क्या ये कंपनियां सॉफ्टवेयर लाइसेंस का खर्च उठा कर वास्तव में लॉन्ग टर्म में मुनाफा बढ़ा पाएंगी? अगर इन AI बंडल्स से ग्राहकों की संख्या में स्थिरता आती है और वे ऊंचे वैल्यू वाले डेटा प्लान्स चुनते हैं, तो निश्चित रूप से प्रति यूजर औसत रेवेन्यू यानी ARPU में बढ़ोतरी होगी। लेकिन, अगर यह खर्च रिटेंशन में नहीं बदलता, तो ऑपरेटिंग मार्जिन्स पर दबाव बढ़ सकता है। इन तमाम पहलुओं पर चर्चा नई दिल्ली में होने वाली 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026' में मुख्य मुद्दा होगी।
