Indus Towers ने अपने इंटरनेशनल एक्सपेंशन की शुरुआत कर दी है। कंपनी ने जाम्बिया और युगांडा में अपने टेलिकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर साइट्स से कमाई शुरू कर दी है और अब इस तिमाही में नाइजीरियाई बाजार में एंट्री की तैयारी है।
इंटरनेशनल मार्केट में पहली दस्तक
Indus Towers ने भारत के बाहर भी अपनी सफलता की कहानी लिखनी शुरू कर दी है। कंपनी ने जाम्बिया और युगांडा में अपने नए टेलिकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर साइट्स से रेवेन्यू हासिल करना शुरू कर दिया है। मैनेजमेंट ने हालिया अर्निंग अपडेट में इसकी पुष्टि की है, जो यह दर्शाता है कि कंपनी अब घरेलू बाजार की कड़ी प्रतिस्पर्धा से आगे निकलकर ग्लोबल फुटप्रिंट बनाने पर जोर दे रही है।
नाइजीरिया पर कंपनी की बड़ी नजर
अगला पड़ाव नाइजीरिया है, जहां कंपनी इस मौजूदा तिमाही में अपनी सेवाएं शुरू करने की योजना बना रही है। नाइजीरिया में बड़ा टेलिकॉम यूजर बेस होने के कारण Indus Towers यहां अपने 'शेयर्ड-इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल' के जरिए पैर पसारने की तैयारी में है। कंपनी की रणनीति अपनी भारतीय इंजीनियरिंग दक्षता और वेंडर मैनेजमेंट के अनुभव को अफ्रीका में एक सस्ता और बेहतर विकल्प के तौर पर पेश करने की है।
कैपेक्स और फाइनेंशियल चुनौतियां
निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि इन इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स का खर्च यानी Capital Expenditure फिलहाल कंपनी के तय बजट के दायरे में है। हालांकि, विदेशी प्रोजेक्ट्स में लॉजिस्टिक्स और अलग रेगुलेटरी माहौल के जोखिम हमेशा बने रहते हैं, जिससे कैश फ्लो पर असर पड़ सकता है।
घरेलू मार्केट में स्थिति मजबूत
ग्लोबल एक्सपेंशन के साथ-साथ कंपनी अपने घरेलू कारोबार पर भी पूरा फोकस बनाए हुए है। पिछली तिमाही में कंपनी ने 2,869 नए टावर जोड़े हैं, जिससे कुल टावर संख्या 2,70,480 पर पहुंच गई है। इसके अलावा, टेनेंट को-लोकेशन में 7,903 का इजाफा हुआ और यह आंकड़ा 4,40,153 हो गया है। Bharti Airtel इसमें कंपनी की मुख्य एंकर टेनेंट बनी हुई है।
निवेशकों के लिए जोखिम
भविष्य में करेंसी उतार-चढ़ाव यानी 'करेंसी वोलेटिलिटी' कंपनी की कमाई पर असर डाल सकती है। साथ ही, अफ्रीका में लंबी अवधि का मुनाफा इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी कितने ज्यादा ऑपरेटर्स को अपने टावर शेयर करने के लिए आकर्षित कर पाती है।
