Telecom Sector: 6 करोड़ MSMEs में दिख रही ग्रोथ की राह, पर टेलीकॉम कंपनियों के सामने ये हैं बड़ी चुनौतियां!

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AuthorKaran Malhotra | Whalesbook News Team

Overview

Telecom Sector की दिग्गज कंपनियों के लिए अच्छी खबर नहीं है। बाजार में पहले से ही ARPU (Average Revenue Per User) में ठहराव और नए ग्राहकों की कमी से जूझ रही इन कंपनियों के लिए ग्रोथ की राह मुश्किल हो गई है। ऐसे में, अब ये कंपनियां देश के **6 करोड़ (60 Million)** छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSMEs) को टारगेट कर रही हैं, ताकि डिजिटल सेवाओं और विज्ञापन से नई कमाई की जा सके। लेकिन इस राह में कई बड़ी चुनौतियां भी हैं।

रेवेन्यू में क्यों आया ठहराव?

भारत की बड़ी टेलीकॉम कंपनियों का रेवेन्यू ग्रोथ पिछले कुछ समय से काफी धीमा पड़ गया है। बाजार पूरी तरह से सैचुरेटेड (saturated) है, जिसमें 1.17 अरब (1.17 billion) से ज़्यादा एक्टिव यूज़र्स हैं और नए ग्राहक जोड़ने की गुंजाइश बहुत कम है। कीमतों में बढ़ोत्तरी और 5G पर भारी खर्च के बावजूद, एवरेज रेवेन्यू पर यूज़र (ARPU) ₹180-₹200 के आसपास ही अटका हुआ है। यहां तक कि डेटा की कीमतें भी काफी कम हैं, करीब ₹9 प्रति GB। इसका मतलब है कि पैसे कमाने के पारंपरिक तरीके अब ज़्यादा काम नहीं कर रहे हैं। Axis Capital का अनुमान है कि आने वाले महीनों में इस सेक्टर में केवल 0-1% की ही रेवेन्यू ग्रोथ देखने को मिलेगी।

6 करोड़ MSMEs पर नई उम्मीद

अब इंडस्ट्री की नज़रें भारत के 6 करोड़ (60 million) माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) पर हैं, जिन्हें ग्रोथ का अगला बड़ा एरिया माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि टेलीकॉम कंपनियां MSMEs को डिजिटल सेवाएं, जैसे ऑनलाइन सेल्स प्लेटफॉर्म और लोकल विज्ञापन (local advertising) देकर अच्छी-खासी कमाई कर सकती हैं। यदि कंपनियां इनमें से कुछ बिज़नेस तक भी पहुंच पाती हैं, तो रोज़ाना के ट्रांजैक्शन्स पर छोटा कमीशन भी सालाना बड़ी कमाई में बदल सकता है। Alvarez & Marsal India की MD, Shilpa Malaiya Singhai के अनुसार, MSMEs पहले से ही भारत के विज्ञापन खर्च का लगभग 25% हिस्सा हैं। टेलीकॉम कंपनियों के पास पहले से ही वाइड रीच, कस्टमर डेटा, मजबूत नेटवर्क और मौजूदा बिलिंग सिस्टम जैसे फायदे हैं, जो उन्हें इस मार्केट को भुनाने में मदद कर सकते हैं।

MSME प्लान के रास्ते में बाधाएं

हालांकि, इस नई रेवेन्यू स्ट्रीम को हकीकत बनाना आसान नहीं है। विश्लेषकों (Analysts) का कहना है कि सालाना अनुमानित ₹50,000 करोड़ के अवसर तक पहुंचने के लिए, टेलीकॉम कंपनियों को सिर्फ ट्रांजैक्शन फीस से आगे बढ़कर, क्लाउड सेवाएं, पेमेंट सिस्टम और मार्केटिंग सहायता जैसे डिजिटल टूल्स का एक पूरा पैकेज पेश करना होगा। Khaitan & Co. के Harsh Walia ने बताया कि मौजूदा कम ARPU एक स्ट्रक्चरल इशू (structural issue) है, जिसका मतलब है कि MSME रेवेन्यू ग्रोथ धीमी होगी और कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगी। कई MSMEs के बजट भी सीमित हैं, और आधे से ज़्यादा के पास अभी भी भरोसेमंद इंटरनेट एक्सेस नहीं है, जिससे इस स्ट्रैटेजी को बढ़ाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

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