जुलाई **2026** तक भारत का टेलीफोन सब्सक्राइबर बेस **135 करोड़** तक पहुंच गया है। वायरलेस और ब्रॉडबैंड की बढ़ती डिमांड के बीच, अब निवेशकों की नजरें सिर्फ संख्या पर नहीं, बल्कि कंपनियों के रेवेन्यू ग्रोथ और **5G** मॉनेटाइजेशन पर टिकी हैं।
जुलाई 2026 में भारतीय टेलीकॉम सेक्टर ने एक नया मुकाम हासिल किया है। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कुल सब्सक्राइबर्स का आंकड़ा 135 करोड़ हो गया है, जिसमें से अकेले 131 करोड़ वायरलेस यूजर्स हैं। हालांकि, ये आंकड़े ग्रोथ की कहानी तो सुना रहे हैं, लेकिन मार्केट अब 'वॉल्यूम' के बजाय 'वैल्यू' यानी ARPU (Average Revenue Per User) पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
रेवेन्यू-लेड ग्रोथ की नई रणनीति
अब कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए ग्राहकों को प्रीमियम डेटा प्लान्स की ओर धकेल रही हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 5G फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस है, जिसमें 2.72 लाख नए यूजर्स जुड़े हैं, जिससे इसका कुल बेस 1.32 करोड़ हो गया है। यह तकनीक कंपनियों को बिना केबल बिछाए हाई-स्पीड इंटरनेट देने की सुविधा देती है, जो उनके मौजूदा 5G इन्फ्रास्ट्रक्चर से कमाई करने का एक स्मार्ट तरीका है।
प्रतिस्पर्धा और कर्ज का चक्रव्यूह
सेक्टर में Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea का दबदबा बरकरार है, लेकिन मार्केट शेयर बचाने की होड़ में कंपनियां भारी मार्केटिंग खर्च कर रही हैं। एक तरफ Bharti Airtel का ARPU ₹200 के स्तर को पार कर चुका है, वहीं दूसरी ओर भारी कर्ज और 5G नेटवर्क के विस्तार के लिए किया जा रहा कैपिटल एक्सपेंडिचर कंपनियों की बैलेंस शीट पर दबाव बना रहा है। अब निवेशकों के लिए देखने वाली बात यह होगी कि ये दिग्गज कंपनियां कर्ज कम करने (deleveraging) और नेटवर्क अपग्रेड के बीच कैसे संतुलन बिठाती हैं।
