क्यों उठी 10 गुना रेट बढ़ाने की मांग?
देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां इंटरनेशनल इनकमिंग कॉल्स पर लगने वाले टर्मिनेशन चार्ज (ITC) में भारी बढ़ोतरी की वकालत कर रही हैं। उनका कहना है कि मौजूदा दरें, जो ₹0.65 प्रति मिनट हैं, ग्लोबल स्टैंडर्ड्स से काफी कम हैं और इनका नाजायज़ फायदा उठाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा फ्रॉड और स्पैम फैलाया जा रहा है। ऑपरेटर्स के मुताबिक, कम रेट की वजह से विदेशी कंपनियां आसानी से बड़ी मात्रा में गलत कॉल्स (जैसे फिशिंग और रोबो-कॉल्स) भारत भेज पा रही हैं।
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के नवंबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2025 में भारत में आने वाले कॉल्स का वॉल्यूम 11.17 अरब मिनट था, जबकि बाहर जाने वाले कॉल्स सिर्फ 0.72 अरब मिनट थे। वॉल्यूम में इस भारी अंतर के बावजूद, इनकमिंग ट्रैफिक से ऑपरेटर्स को केवल ₹723 करोड़ मिले, जबकि आउटगोइंग कॉल्स के लिए विदेशी कैरियर्स को ₹252 करोड़ का भुगतान करना पड़ा। ऑपरेटर्स ने स्पैम रोकने के लिए काफी निवेश किया है, लेकिन कम लागत पर आने वाले फ्रॉड ट्रैफिक को रोकना मुश्किल हो रहा है। ITC बढ़ाकर, ये कंपनियां फ्रॉड करने वालों के लिए इसे महंगा और मुश्किल बनाना चाहती हैं।
ग्लोबल बेंचमार्क और आर्थिक चिंताएं
टेलीकॉम कंपनियों की मांग को ग्लोबल ट्रेंड्स का भी सहारा है। कई देश, जैसे यूके, चीन, नाइजीरिया, तुर्की और सूडान, पहले ही अपने इंटरनेशनल टर्मिनेशन चार्जेस बढ़ा चुके हैं। भारत की दरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी पीछे हैं। उदाहरण के लिए, यूके में मोबाइल टर्मिनेशन रेट 0.5 पेंस प्रति मिनट (लगभग ₹0.50) के आसपास है, और बांग्लादेश के लिए इंटरनेशनल वॉइस टर्मिनेशन रेट 1.5 यूएस सेंट प्रति मिनट है। भारत की स्थिर कम दरें इंटरनेशनल एग्रीगेटर्स को सस्ते में कॉल्स रूट करने और बड़ा मुनाफा कमाने का मौका दे रही हैं।
सुरक्षा चिंताओं के अलावा, यह असंतुलन सीधे तौर पर वित्तीय जोखिम भी पैदा करता है। विदेश में जाने वाली कॉल्स के चार्जेस अक्सर डॉलर में होते हैं, जिससे रुपया कमजोर होने पर भारतीय ऑपरेटर्स पर लागत का बोझ बढ़ जाता है। फाइनेंशियल ईयर 2024 में भारतीय टेलीकॉम सेक्टर का ग्रॉस रेवेन्यू लगभग $40 बिलियन था, लेकिन ITC से हो रहा रेवेन्यू लीकेज एक बड़ी अक्षमता बनी हुई है।
रेगुलेटरी और कंज्यूमर पर असर
टेलीकॉम ऑपरेटर्स का कहना है कि यह प्रस्तावित बढ़ोतरी सीधे तौर पर घरेलू ग्राहकों पर असर नहीं डालेगी। यह चार्ज विदेशी कैरियर्स और इंटरनेशनल एग्रीगेटर्स द्वारा वहन किया जाएगा, इसलिए भारत में ग्राहकों को अपनी कॉलिंग रेट्स में कोई बढ़ोतरी देखने को नहीं मिलेगी। यह TRAI के कंज्यूमर इंटरेस्ट की रक्षा करने और टेलीकॉम इकोसिस्टम की वित्तीय सेहत व सुरक्षा सुनिश्चित करने के लक्ष्य के अनुरूप है। सरकार के लिए भी यह अच्छी खबर हो सकती है, क्योंकि ITC एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का हिस्सा होता है, जिससे सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी। TRAI ने पहले भी 2018 में इंटरनेशनल इनकमिंग कॉल टर्मिनेशन रेट को ₹0.40 से बढ़ाकर ₹0.53 प्रति मिनट किया था। मौजूदा मांग पिछले स्तरों से काफी बड़ी है, जो बढ़ते फ्रॉड और आर्थिक असमानता को दर्शाती है। कुल मिलाकर, यह कदम केवल एक टैरिफ एडजस्टमेंट नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय खतरों के खिलाफ एक रणनीतिक रक्षा कवच है।