ARPU में उछाल और डेटा की बढ़ती मांग
भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में प्रति यूजर औसत कमाई (ARPU) में 13-15% की सालाना वृद्धि का अनुमान है, जो कि फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) तक देखने को मिल सकता है। इस तेजी की मुख्य वजह अगले फाइनेंशियल ईयर 2027 (FY27) की दूसरी तिमाही में मोबाइल टैरिफ में 15% की संभावित बढ़ोतरी और डेटा की लगातार बढ़ती मांग है।
आजकल एक औसत भारतीय यूजर हर महीने 21.5 GB से ज्यादा डेटा इस्तेमाल कर रहा है, और डेटा की प्रति GB कीमत लगभग ₹8.97 है। अब कंपनियां सब्सक्राइबर बढ़ाने की बजाय अपने मौजूदा यूजर्स से ज्यादा कमाई करने पर फोकस कर रही हैं। यह ट्रेंड भारत की डिजिटल इकोनॉमी के लिए भी बड़ा संकेत है, जिसके 2029-30 तक देश की कुल आय में 20% योगदान देने की उम्मीद है। सरकार की 5G अपनाने की मुहिम भी इस आउटलुक को मजबूत कर रही है, जिससे FY26 तक 220-250 मिलियन यूजर्स 5G से जुड़ सकते हैं, और इससे प्रीमियम प्लान्स से कमाई का रास्ता खुलेगा।
कॉम्पिटिशन और निवेश का बढ़ता फासला
इस ARPU ग्रोथ का सबसे ज्यादा फायदा Bharti Airtel और Reliance Jio को मिलने की उम्मीद है। Bharti Airtel, जिसकी मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1.13-1.21 लाख करोड़ है और TTM P/E 32.83x के आसपास है, एक प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, इसके शेयर का टारगेट प्राइस ₹2,355.97 है, जो मौजूदा भाव से 19% से ज्यादा की तेजी का संकेत देता है। एनालिस्ट्स Airtel को 'BUY' रेटिंग दे रहे हैं, इसकी मजबूत फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश को देखते हुए। पिछले पांच सालों (FY21-25) में, Airtel और Jio ने मिलकर अपने नेटवर्क में अनुमानित $35 बिलियन (Airtel का $15 बिलियन और Jio का $20 बिलियन) का निवेश किया है। अगले तीन सालों में, वे संयुक्त रूप से $14-16 बिलियन और निवेश करने की योजना बना रहे हैं। Q2FY26 तक, Airtel का ARPU ₹256 और Jio का ₹211.4 था, जो इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा है।
इसके बिल्कुल उलट, Vodafone Idea (Vi) की मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब ₹1.18-1.21 लाख करोड़ है, लेकिन इसका TTM P/E रेश्यो -4.9x है, जो इसके गहरे वित्तीय संकट को दिखाता है। Vi को AGR ड्यूज (एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू ड्यूज) के मामले में ₹87,695 करोड़ का भुगतान 15 साल की अवधि में करने की राहत मिली है, लेकिन इससे कंपनी को कैश फ्लो में थोड़ी राहत तो मिली है, पर यह कोई बड़ा स्ट्रक्चरल बूस्ट नहीं है।
एनालिस्ट्स का कहना है कि Vi की अगले पांच सालों में $2.6 बिलियन और अगले तीन सालों में कुल ₹45,000 करोड़ का नेटवर्क निवेश की योजना, उसके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी कम है। कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में इस बड़े गैप के साथ, 2029 से शुरू होने वाले स्पेक्ट्रम भुगतान की बड़ी देनदारियां Vi की मार्केट पोजिशन के लिए एक लगातार चुनौती बनी रहेंगी। ऐसे में Vi का फोकस फिलहाल अपने सब्सक्राइबर बेस को स्थिर रखने पर है, न कि मार्केट शेयर वापस पाने पर, और इसके शेयर मिड-टीन्स में रहने का अनुमान है।
Vi की असलियत
Vi को मिली AGR ड्यूज की राहत से उसकी तत्काल वित्तीय समस्या तो कम हुई है, लेकिन यह उसके स्ट्रक्चरल नुकसान को दूर नहीं करती। कंपनी लगातार सब्सक्राइबर खो रही है, अकेले Q2FY26 में 1 मिलियन से ज्यादा का शुद्ध नुकसान हुआ। कंपनी की निगेटिव अर्निंग्स प्रति शेयर (TTM -₹2.50) और बुक वैल्यू प्रति शेयर (₹-7.57) इसके गंभीर वित्तीय संकट को दर्शाते हैं।
इसके अलावा, कंपनी की सेल्स ग्रोथ कमजोर रही है और प्रमोटर होल्डिंग भी घटी है। Q2FY26 में Vi का ARPU ₹167 था, जो Airtel और Jio से काफी पीछे है। एनालिस्ट्स का मानना है कि भविष्य के खर्चों को पूरा करने के लिए Vi को FY29 तक अपना ARPU ₹340 तक ले जाना होगा। मार्केट की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, कुछ एनालिस्ट्स 'SELL' या 'HOLD' रेटिंग दे रहे हैं, और इसका कंसेंसस प्राइस टारगेट ₹9.88 है, जो इसके मौजूदा ट्रेडिंग प्राइस ₹11.16 से काफी कम है। यह इस बात को दर्शाता है कि Vi की लॉन्ग-टर्म वायबिलिटी पर संदेह बना हुआ है।
नेटवर्क निवेश में गैप भी एक अहम फैक्टर है — FY25 में Vi का निवेश ₹10,000 करोड़ था, जबकि Airtel का ₹30,000 करोड़ और Jio का पिछले तीन सालों का औसत ₹46,000 करोड़ था। यह अंतर भविष्य की कॉम्पिटिटिव पोजिशन को तय करेगा।
आगे का रास्ता
एनालिस्ट्स का अनुमान है कि भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में ARPU ग्रोथ जारी रहेगी, और यह FY26 के अंत तक ₹220 तक पहुंच सकता है। Bharti Airtel और Reliance Jio को सबसे ज्यादा फायदा होगा, वे अपनी बेहतर नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस पोर्टफोलियो का इस्तेमाल करके वैल्यू कैप्चर करेंगे। Vodafone Idea के लिए आगे का रास्ता चुनौतियों से भरा है, उन्हें अपने दायित्वों और नेटवर्क अपग्रेड की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारी फंड की जरूरत होगी और ऑपरेटिंग कैश फ्लो में तेजी से सुधार करना होगा। मार्केट को उम्मीद है कि यह विभाजन जारी रहेगा, लीडर्स अपनी पोजिशन मजबूत करेंगे, जबकि पीछे रहने वाली कंपनियां, अस्थायी नियामक मदद के बावजूद, अस्तित्व के सवालों का सामना करती रहेंगी।
