संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने **2030** तक **1 अरब** 5G यूजर्स का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। भारत अब तेजी से 6G इनोवेशन और इंडस्ट्रियल AI की ओर बढ़ रहा है, जिससे टेलीकॉम सेक्टर में हाई-वैल्यू मोनेटाइजेशन की नई शुरुआत होगी।
भारतीय टेलीकॉम सेक्टर अब नेटवर्क बिछाने के दौर से आगे बढ़कर हाई-वैल्यू इंडस्ट्रियल उपयोग और स्वदेशी तकनीक पर फोकस कर रहा है। 'इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026' में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने वर्तमान 55 करोड़ यूजर्स के आंकड़े को 2030 तक 1 अरब तक ले जाने का रोडमैप पेश किया है। यह कदम भारत को केवल उपकरणों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि टेलीकॉम डिजाइन और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी का वैश्विक हब बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
इनोवेशन और पेटेंट की रेस
भारत सरकार की 'भारत 6G एलायंस' (Bharat 6G Alliance) के जरिए अब तक 7,700 पेटेंट फाइल किए जा चुके हैं, जिनमें से 4,400 इंटरनेशनल पेटेंट हैं। भारत का लक्ष्य वैश्विक 6G पेटेंट में कम से कम 10% हिस्सेदारी हासिल करना है। इसके साथ ही स्वदेशी 4G स्टैक और PLI स्कीम के सफल क्रियान्वयन से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को भी जबरदस्त बूस्ट मिला है।
कर्ज का बोझ और टैरिफ में बढ़ोतरी
विस्तार की इन योजनाओं के बीच सेक्टर के सामने ₹5.9 लाख करोड़ का भारी कर्ज एक बड़ी चुनौती है। हालांकि कर्ज में 7% की कमी आई है, फिर भी 5G के लिए किए गए भारी निवेश को वसूलने का दबाव बना हुआ है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियां अपनी प्रॉफिटेबिलिटी सुधारने के लिए अगले 4 से 5 महीनों में टैरिफ में 12% से 15% तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं।
कॉम्पिटिशन और रिस्क
बाजार में Vodafone Idea के सामने मौजूद वित्तीय चुनौतियों के कारण भविष्य में Reliance Jio और Bharti Airtel के 'डुओपॉली' (Duopoly) बनने का डर भी बना हुआ है। इसके अलावा, कम फाइबर फाइबरइजेशन (Fiberisation) और किफायती उपकरणों की कमी जैसे मुद्दे भी इंडस्ट्री की ग्रोथ की राह में बाधा बन सकते हैं। निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि कंपनियां उपभोक्ता डेटा से निकलकर बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) उपयोग के जरिए अपना कैश फ्लो कैसे सुधारती हैं।
