Digital Communications Commission ने सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लिए **5%** रेवेन्यू-बेस्ड स्पेक्ट्रम चार्ज को मंजूरी दे दी है। यह Starlink, OneWeb और Reliance Jio के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है, हालांकि अभी कैबिनेट की अंतिम मंजूरी और सुरक्षा क्लियरेंस का इंतजार है।
भारत में सैटेलाइट-आधारित इंटरनेट सेवाओं की रेस अब नई ऊंचाई पर है। सितंबर 2026 में, Digital Communications Commission (DCC) ने सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटित करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया (administrative process) को हरी झंडी दे दी है। नीलामी के पुराने तरीके के बजाय यह नया फैसला Starlink, Eutelsat OneWeb और Reliance Jio जैसी कंपनियों के लिए लागत का बोझ कम करने वाला साबित हो सकता है।
क्या हैं नए नियम?
प्रस्तावित नियमों के तहत, ऑपरेटर्स को अपने एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) का 5% स्पेक्ट्रम चार्ज के रूप में देना होगा। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट पहुँचाने के लिए सरकार ने इस चार्ज में 1% की छूट देने का फैसला भी किया है। स्पेक्ट्रम का आवंटन शुरुआत में 5 साल के लिए होगा, जिसे 2 साल और आगे बढ़ाया जा सकेगा।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
निवेशकों के लिए इस सेक्टर में बड़ी वित्तीय चुनौतियां भी हैं। Jio Platforms ने अपने IPO के लिए जो Draft Red Herring Prospectus फाइल किया है, उसमें लगभग ₹27,500 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करने की बात कही गई है। कंपनी का ध्यान एक तरफ बैलेंस शीट मजबूत करने पर है, तो दूसरी तरफ सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च भी करना है।
आगे की राह
हालांकि नियम स्पष्ट हैं, लेकिन कमर्शियल लॉन्च के लिए अभी कैबिनेट की अंतिम मुहर और सिक्योरिटी क्लियरेंस की दरकार है। सैटेलाइट को लॉन्च करना और मेंटेन करना बहुत महंगा है, जिससे शुरुआती सालों में मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है। अब मार्केट की नजर इस बात पर है कि ये कंपनियां अपनी नकदी को बिजनेस की किन प्राथमिकताओं में खर्च करती हैं और क्या उनका कैश फ्लो इस लंबे 'जेस्टेशन पीरियड' को झेल पाएगा।
