Satcom Services in India: सैटेलाइट इंटरनेट के लिए बड़ा कदम, 5% स्पेक्ट्रम फीस पर लगी मुहर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Satcom Services in India: सैटेलाइट इंटरनेट के लिए बड़ा कदम, 5% स्पेक्ट्रम फीस पर लगी मुहर

भारत में सैटेलाइट ब्रॉडबैंड के लॉन्च का रास्ता साफ हो रहा है। डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (DCC) ने **5%** रेवेन्यू-बेस्ड स्पेक्ट्रम चार्ज को मंजूरी दे दी है। अब Starlink, Eutelsat OneWeb और Jio Satellite को अंतिम कैबिनेट मंजूरी और सिक्योरिटी क्लियरेंस का इंतजार है।

स्पेक्ट्रम चार्ज और पॉलिसी की बारीकियां

डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (DCC) ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन स्पेक्ट्रम के लिए एक स्पष्ट प्राइसिंग फ्रेमवर्क तैयार किया है। इसके तहत 5% एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) लेवी तय की गई है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में सर्विस को बढ़ावा देने के लिए इसमें 1% की छूट भी दी जाएगी। नई पॉलिसी के अनुसार, ऑपरेटर्स को शुरुआती 5 साल के लिए प्रशासनिक तौर पर स्पेक्ट्रम दिया जाएगा, जिसे बाद में 2 साल के लिए और बढ़ाया जा सकेगा। वहीं, न्यूनतम वार्षिक चार्ज ₹3,500 प्रति MHz रखा गया है।

अभी और क्या बाकी है?

भले ही प्राइसिंग का मसला सुलझ गया हो, लेकिन कमर्शियल लॉन्च में अभी वक्त है। इस प्रस्ताव को अब यूनियन कैबिनेट की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। इसके अलावा, ऑपरेटर्स को दूसरे चरण की सिक्योरिटी क्लियरेंस और विदेशी निवेश (FDI) से जुड़े नियमों का भी पालन करना होगा।

इनवेस्टर्स के लिए क्या हैं चुनौतियां?

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की कमर्शियल वायबिलिटी है। फिलहाल, टर्मिनल इक्विपमेंट की लागत ₹20,000 से ₹50,000 प्रति यूनिट के बीच है। कंपनियां इस भारी खर्च और रेवेन्यू लेवी के बीच संतुलन कैसे बैठाती हैं, यह देखना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सैटेलाइट इंटरनेट मौजूदा 5G या फाइबर नेटवर्क का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक (complementary) होगा। इसका उपयोग मुख्य रूप से दूरदराज के एंटरप्राइजेज और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किया जाएगा। अब बाजार की नजरें यूनियन कैबिनेट की अंतिम अधिसूचना (Notification) पर टिकी हैं, जिसके बाद ही लाइसेंसिंग और ऑपरेशनल लाइसेंस की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.