Satellite Internet India: सुरक्षा जांच के चलते लॉन्च पर रोक, Starlink और OneWeb को झटका

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Satellite Internet India: सुरक्षा जांच के चलते लॉन्च पर रोक, Starlink और OneWeb को झटका

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की सेवाएं शुरू होने में अभी और वक्त लगेगा। सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए Starlink और OneWeb जैसी कंपनियों के लाइसेंसिंग और स्पेक्ट्रम को अंतिम मंजूरी देने पर रोक लगा दी है। मई 2026 में जारी किए गए 29 नए नियमों का पालन करना इन कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती है।

आखिर क्यों टला लॉन्च?

भारत में विदेशी कंपनियों द्वारा सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के व्यावसायिक लॉन्च पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। सरकार विदेशी ऑपरेटर्स को लेकर बेहद सतर्क रुख अपना रही है। शुरुआती दिलचस्पी और प्रारंभिक लाइसेंस जारी होने के बावजूद, किसी भी कंपनी को संचालन शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। यह देरी तब हो रही है जब रेगुलेटरी चर्चाएं शुरू हुए चार साल से ज्यादा का समय बीत चुका है।

मई 2026 के कड़े नियम

मई 2026 में भारतीय सरकार ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर के लिए 29 नए नियम लागू किए, जिसने रेगुलेटरी माहौल को पूरी तरह बदल दिया। इन नियमों के तहत, सभी सैटेलाइट ऑपरेटर्स को कॉल लॉग्स और यूजर डेटा भारत में ही स्टोर करना होगा। साथ ही, उन्हें पूरी लॉफुल इंटरसेप्शन (lawful interception) क्षमता सुनिश्चित करनी होगी। दूरसंचार विभाग (DoT) ने इन आवश्यकताओं को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा है। इसका मुख्य मकसद ऑपरेटर्स को घरेलू इंटरनेट गेटवे को बायपास करने से रोकना है, जिससे ट्रैफिक को विदेशी सुविधाओं के माध्यम से रूट किया जा सके।

Starlink और OneWeb की मुश्किलें

Elon Musk की Starlink, Eutelsat OneWeb और Amazon Leo जैसी प्रमुख कंपनियां इन नियमों के ढांचे का पालन करने की कोशिश कर रही हैं। Starlink, जिसे पहले एक आवेदन अस्वीकृति का सामना करना पड़ा था, अब डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) तकनीक को एकीकृत करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए फिर से आवेदन कर रही है। इन फर्मों के लिए चुनौती यह है कि वे भारत की विशिष्ट घरेलू स्टोरेज और इंटरसेप्शन आवश्यकताओं को पूरा करने वाले कस्टम सुरक्षा आर्किटेक्चर का निर्माण करें।

Reliance Jio की अपनी राह

वहीं, Reliance Jio एक संप्रभु लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन विकसित कर रही है। जुलाई 2026 में, Jio Satellite Communications को इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथोराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) से तकनीकी व्यवहार्यता (technical viability) क्लीयरेंस मिली। लगभग 1,600 सैटेलाइट वाली यह परियोजना, सरकार के स्वदेशी संचार बुनियादी ढांचे के निर्माण के उद्देश्य के अनुरूप है। उद्योग पर्यवेक्षकों का मानना है कि घरेलू कंपनियों का इन नए सुरक्षा प्रोटोकॉल के साथ तालमेल विदेशी संस्थाओं की तुलना में उनके अनुमोदन पथ को सुव्यवस्थित कर सकता है।

भू-राजनीतिक चिंताएं और आगे का रास्ता

सरकार की हिचकिचाहट के पीछे व्यापक भू-राजनीतिक विचार भी हैं। अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों के बाद, जहां निजी सैटेलाइट नेटवर्क का सैन्य और संवेदनशील क्षेत्रों में उपयोग ने विदेशी-नियंत्रित बुनियादी ढांचे को विनियमित करने की चुनौतियों को उजागर किया, सतर्कता बढ़ गई है। इसलिए, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और गृह मंत्रालय (MHA) कथित तौर पर कड़ा निरीक्षण कर रहे हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि कोई भी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड परिनियोजन राष्ट्रीय संचार नेटवर्क से समझौता न करे।

निवेशकों और उद्योग जगत के लिए, अब ध्यान स्पेक्ट्रम आवंटन और अंतिम सुरक्षा साइन-ऑफ की समय-सीमा पर है। अगली बड़ी अपडेट इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या विदेशी ऑपरेटर मई 2026 की डेटा संप्रभुता (data sovereignty) आवश्यकताओं को पूरा कर पाते हैं और क्या सरकार स्पेक्ट्रम मूल्य निर्धारण के लिए एक स्पष्ट ढांचा प्रदान करती है। जब तक ये अंतिम मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक भारतीय उपभोक्ताओं के लिए हाई-स्पीड सैटेलाइट ब्रॉडबैंड की उपलब्धता रुकी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.