डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) ने 5G रेडिएशन लिमिट को **5 वॉट** से बढ़ाकर **10 वॉट** प्रति स्क्वायर मीटर कर दिया है। इस बदलाव से Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसी कंपनियों को अब कम टावर लगाने पड़ेंगे, जिससे उनका कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) कम होगा।
सरकार के इस नए फैसले से टेलीकॉम इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिली है। अब तक भारतीय मानक काफी सख्त थे, जिससे कंपनियों को घनी आबादी वाले इलाकों में भी बहुत ज्यादा बेस स्टेशन लगाने पड़ते थे। इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स (ICNIRP) के बराबर किए गए इस बदलाव से अब कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की लागत में सीधी बचत होगी।
कंपनियों के लिए क्या हैं फायदे?
Reliance Jio, Bharti Airtel और Vodafone Idea जैसे प्लेयर्स के लिए यह नियम गेम-चेंजर साबित हो सकता है। कम टावर लगाने का मतलब है कि अब एक ही बेस स्टेशन से ज्यादा एरिया कवर किया जा सकेगा। इससे न सिर्फ मेंटेनेंस कॉस्ट घटेगी, बल्कि आने वाले समय में ऑपरेटिंग मार्जिन में भी सुधार की उम्मीद है।
इन्वेस्टर्स की नजर में क्या है?
इंडस्ट्री में अभी तक $50 अरब से ज्यादा का निवेश हो चुका है। अब बड़ा सवाल यह है कि कंपनियां इस ऑपरेशनल आसानी को प्रॉफिट में कैसे बदलती हैं। निवेशकों को अब अगली तिमाही की अर्निंग्स कॉल में यह देखना होगा कि कंपनियां अपना कैपिटल एक्सपेंडिचर गाइडेंस कितना कम करती हैं। हालांकि, नेटवर्क क्वालिटी और सर्विस को लेकर TRAI की निगरानी अभी भी एक अहम फैक्टर बनी रहेगी।
