भारत सरकार ने Starlink और विभिन्न राज्यों के बीच हुए समझौतों (MoUs) पर फिलहाल रोक लगा दी है। अधिकारियों का कहना है कि कंपनी को देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएँ चलाने के लिए ज़रूरी कॉमर्शियल लाइसेंस मिलने तक ये समझौते आगे नहीं बढ़ सकते।
Starlink के राज्य स्तरीय समझौतों पर सरकारी रोक
भारत सरकार ने Starlink और कई राज्य सरकारों के बीच हुए एमओयू (MoUs) को फिलहाल रोक दिया है। सरकारी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि सैटेलाइट इंटरनेट प्रोजेक्ट्स से जुड़े ये शुरुआती समझौते, कंपनी द्वारा सेंट्रल गवर्नमेंट से ज़रूरी कॉमर्शियल ऑपरेटिंग लाइसेंस प्राप्त किए बिना आगे नहीं बढ़ सकते।
Starlink, जो कि ग्लोबल स्पेस फर्म SpaceX की सहायक कंपनी है, भारतीय बाज़ार में प्रवेश करने की कोशिश कर रही है, लेकिन अभी उसके पास कॉमर्शियल सेवाएं शुरू करने के लिए अंतिम नियामक मंजूरी नहीं है। सरकार का यह कदम इस बात की याद दिलाता है कि विदेशी सैटेलाइट प्रोवाइडर्स को बड़े पैमाने पर सेवा शुरू करने से पहले सख्त अनुपालन मानकों को पूरा करना होगा।
नियामक बाधाएं और सुरक्षा जांच
यह देरी मुख्य रूप से चल रही सुरक्षा समीक्षाओं से जुड़ी है। केंद्र सरकार Starlink की परिचालन संरचना की गहन जांच कर रही है, जिसमें डेटा हैंडलिंग, भारतीय सर्वर पर स्टोरेज और संचार की लॉफुल इंटरसेप्शन (lawful interception) को सपोर्ट करने की कंपनी की क्षमता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां विशेष रूप से विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क्स को लेकर सतर्क हैं, खासकर उनकी मजबूती और भू-राजनीतिक संकटों या सीमावर्ती जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में उनकी भेद्यता (vulnerability) को लेकर।
स्टारलिंक ने अगस्त 2026 में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) में अपनी Gen 2 सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन के लिए एक नया आवेदन जमा किया है, जिसमें एडवांस्ड डायरेक्ट-टू-डिवाइस टेक्नोलॉजी भी शामिल है। इस कॉन्स्टेलेशन के लिए मंजूरी हासिल करना कंपनी की दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच प्रदान करने की योजना का एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह प्रक्रिया अभी भी सख्त सरकारी निगरानी के अधीन है।
प्रतिस्पर्धी परिदृश्य और सेक्टर का संदर्भ
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट प्रोवाइडर्स के लिए बाजार काफी प्रतिस्पर्धी है। प्रमुख खिलाड़ी अपनी बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं, जिनमें Eutelsat OneWeb, Reliance Jio का सैटेलाइट वेंचर और टाटा ग्रुप समर्थित Nelco शामिल हैं। ये प्रतिस्पर्धी भी संचालन के लिए आवश्यक लाइसेंस और स्पेक्ट्रम अप्रूवल हासिल करने के लिए जटिल नियामक माहौल को नेविगेट कर रहे हैं।
निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के लिए, मुख्य देखने वाली बात Starlink की नियामक स्वीकृतियों की समय-सीमा है। जब तक गृह मंत्रालय और अन्य संबंधित प्राधिकरण अंतिम सुरक्षा मंजूरी नहीं दे देते, तब तक Starlink कॉमर्शियल सेवाएं शुरू करने या राज्य स्तर पर हस्ताक्षरित किसी भी समझौते को लागू करने से प्रतिबंधित है। कंपनी के सेवा लॉन्च का मार्ग इन विशिष्ट सुरक्षा और डेटा अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा करने पर निर्भर करता है, जो भारतीय बाजार में अंतर्राष्ट्रीय सैटेलाइट खिलाड़ियों के लिए प्रवेश की मुख्य बाधा बने हुए हैं।
