भारत सरकार ने Starlink, Reliance Jio और Eutelsat OneWeb को सैटेलाइट कम्युनिकेशन लाइसेंस जारी कर दिए हैं। हालांकि, अभी कमर्शियल ब्रॉडबैंड सेवाएं शुरू होने में समय लगेगा क्योंकि कंपनियां अभी स्पेक्ट्रम प्राइसिंग और सिक्योरिटी क्लीयरेंस का इंतजार कर रही हैं।
लाइसेंस मिलने का क्या मतलब है?
भारत सरकार ने सैटेलाइट इंटरनेट की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इन तीन प्रमुख कंपनियों को लाइसेंस दे दिया है। इसका मतलब यह है कि ये कंपनियां अब भारतीय बाजार में अपनी तैयारी शुरू कर सकती हैं। हालांकि, ग्राहकों के लिए सेवाएं अभी तुरंत शुरू नहीं होंगी। अभी सरकार को स्पेक्ट्रम के दाम और रेवेन्यू-शेयरिंग मॉडल को अंतिम रूप देना बाकी है।
सिक्योरिटी और रेगुलेशन का पेंच
केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस मिलना ही काफी नहीं है। सभी ऑपरेटरों को कड़े सुरक्षा मानकों (Security Assessments) से गुजरना होगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य हैं। इसके अलावा, डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) और ट्राई (TRAI) स्पेक्ट्रम चार्ज मैकेनिज्म को फाइनल कर रहे हैं, जो यह तय करेगा कि इन कंपनियों के लिए भारत में कारोबार करना कितना महंगा होगा।
विवाद और बाजार में प्रतिस्पर्धा
हाल ही में SpaceX के प्रमुख एलन मस्क ने कुछ कंपनियों पर भारत में एकाधिकार जमाने की कोशिश का आरोप लगाया था। हालांकि, भारत सरकार ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी रेगुलेटरी पॉलिसी पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
निवेशकों के लिए यह सेक्टर ग्रोथ का नया जरिया बन सकता है। खासकर उन इलाकों में, जहां फाइबर ऑप्टिक केबल बिछाना मुश्किल है। Reliance Industries की इस क्षेत्र में मौजूदगी यह दर्शाती है कि वे अपने टेलिकॉम मार्केट को सुरक्षित रखने के लिए तैयार हैं। अब निवेशकों को कंपनियों की फाइलिंग्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि स्पेक्ट्रम की अंतिम कीमत सीधे तौर पर कंपनियों के 'कैपिटल एक्सपेंडिचर' (Capex) और मुनाफे को प्रभावित करेगी।
