Telecom Commission: सरकार का बड़ा फैसला, 37 साल पुरानी संस्था भंग; अब सीधे कैबिनेट लेगा फैसले

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AuthorMehul Desai|Published at:
Telecom Commission: सरकार का बड़ा फैसला, 37 साल पुरानी संस्था भंग; अब सीधे कैबिनेट लेगा फैसले

सरकार ने 37 साल पुरानी Digital Communications Commission को भंग कर दिया है। इस बदलाव के बाद टेलीकॉम सेक्टर के तमाम बड़े फैसले, जिसमें सैटेलाइट स्पेक्ट्रम भी शामिल है, अब सीधे कैबिनेट के अधिकार क्षेत्र में होंगे।

क्या बदला है गवर्नेंस स्ट्रक्चर?

भारत सरकार ने 19 सितंबर, 2026 को जारी एक नोटिफिकेशन के जरिए Digital Communications Commission को खत्म करने का ऐलान किया है। 37 साल से काम कर रही यह संस्था टेलीकॉम सेक्टर में स्पेक्ट्रम प्राइसिंग और पॉलिसी से जुड़े अहम फैसलों की सिफारिश करने वाली मुख्य बॉडी थी।

क्यों था यह आयोग जरूरी?

साल 1989 में 'Telecom Commission' के तौर पर शुरू हुई यह बॉडी वित्त मंत्रालय, NITI Aayog और अन्य सरकारी विभागों के बीच एक पुल का काम करती थी। अब इस बीच की कड़ी को हटाकर सारी पावर को सीधे कैबिनेट और कम्युनिकेशंस मिनिस्ट्री के एडमिनिस्ट्रेटिव विंग में ट्रांसफर कर दिया गया है।

सैटेलाइट कंपनियों पर असर

यह फैसला ऐसे समय आया है जब Reliance Industries की Jio Satellite Communications, Starlink और Eutelsat OneWeb जैसी दिग्गज कंपनियां सरकारी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। इन कंपनियों के लिए सैटेलाइट स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट और सिक्योरिटी क्लीयरेंस बेहद जरूरी है ताकि वे अपनी कमर्शियल सर्विस शुरू कर सकें।

निवेशकों के लिए संकेत

इस कदम से प्रशासनिक देरी कम होने की उम्मीद है, लेकिन बाजार अब इस बात पर नजर रखेगा कि कैबिनेट पेंडिंग सैटेलाइट स्पेक्ट्रम नियमों पर कितनी तेजी से निर्णय लेता है। क्या यह सरकारी अप्रोच नई सैटेलाइट प्लेयर्स के लिए एंट्री आसान बनाएगी या मौजूदा टेलीकॉम खिलाड़ियों के लिए चुनौतियां बढ़ेंगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.