GSMA का बड़ा प्रस्ताव: भारत में साइबर फ्रॉड रोकने के लिए बदले नियम, 5G पॉलिसी में बदलाव की मांग

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
GSMA का बड़ा प्रस्ताव: भारत में साइबर फ्रॉड रोकने के लिए बदले नियम, 5G पॉलिसी में बदलाव की मांग

ग्लोबल इंडस्ट्री बॉडी GSMA ने भारत में साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए एक नई 'क्रॉस-सेक्टर' रेगुलेटरी रूपरेखा का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही संस्था ने 5G नेटवर्क स्लाइसिंग (network slicing) के लिए अधिक लचीली नीतियों की वकालत की है, जिससे टेलीकॉम कंपनियों की कमाई में इजाफा हो सकता है।

GSMA, जो दुनिया भर के मोबाइल ऑपरेटर्स का प्रतिनिधित्व करती है, ने भारतीय रेगुलेटर्स से डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए एक व्यापक और क्रॉस-सेक्टर दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है। वर्तमान में, भारत में रेगुलेटरी रणनीतियां अलग-अलग क्षेत्रों (जैसे टेलीकॉम, बैंकिंग और सोशल मीडिया) के लिए अलग-अलग नियमों पर चलती हैं। चूंकि आधुनिक साइबर अपराधी पूरी डिजिटल चेन का फायदा उठा रहे हैं, इसलिए संस्था का तर्क है कि अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नीतियां ग्राहकों को सुरक्षित रखने के लिए नाकाफी हैं।

5G से कमाई के नए अवसर

फ्रॉड रोकने के अलावा, GSMA भारत में 5G तैनाती के तरीके को बदलने पर जोर दे रही है। संस्था एक ऐसी 'आउटकम-फोक्स्ड' पॉलिसी की वकालत कर रही है जो इनोवेशन को बढ़ावा दे, खासकर 'नेटवर्क स्लाइसिंग' तकनीक के मामले में। आसान शब्दों में कहें तो, नेटवर्क स्लाइसिंग के जरिए टेलीकॉम कंपनियां अपने 5G नेटवर्क का एक समर्पित हिस्सा खास तौर पर कॉर्पोरेट क्लाइंट्स के लिए अलग रख सकती हैं, ताकि उन्हें हाई-स्पीड और स्टेबल सर्विस दी जा सके।

Reliance Jio और Bharti Airtel जैसी दिग्गज कंपनियों के लिए, जिन्होंने 5G इंफ्रास्ट्रक्चर पर ₹1,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया है, यह लचीलापन कैपिटल पर रिटर्न सुधारने के लिए बहुत जरूरी माना जा रहा है।

नेट न्यूट्रैलिटी पर बहस

इन प्रस्तावों ने भारत में 'नेट न्यूट्रैलिटी' (Net Neutrality) की पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर दिया है। आलोचकों का मानना है कि टेलीकॉम कंपनियों को टियर-बेस्ड (tiered) सर्विस देने की छूट देने से इंटरनेट दो हिस्सों में बंट सकता है, जहां प्रीमियम यूजर्स को प्राथमिकता मिलेगी और आम जनता को धीमी गति का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, GSMA ने इस तर्क का बचाव करते हुए कहा है कि इसका मकसद बेसिक कंज्यूमर सर्विस को खराब करना नहीं, बल्कि उन बिजनेस ऑपर्च्युनिटीज को अनलॉक करना है जिन्हें स्टैंडर्ड नेटवर्क नहीं संभाल सकते। अब निवेशकों की नजर Telecom Regulatory Authority of India (TRAI) के रुख पर है कि वह इन प्रस्तावों और नेट न्यूट्रैलिटी के बीच संतुलन कैसे बनाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.