भारत में **43 करोड़** 5G यूजर्स का आंकड़ा पार करने के बाद अब Ericsson India ने अपनी रणनीति बदल ली है। कंपनी अब नेटवर्क विस्तार के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सॉफ्टवेयर-आधारित सर्विसेज से कमाई करने पर जोर दे रही है।
भारतीय टेलीकॉम सेक्टर अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। 2025 के अंत तक देश में 43 करोड़ 5G सब्सक्रिप्शन का लक्ष्य हासिल करने के बाद, अब इंडस्ट्री का ध्यान 'नेटवर्क बिछाने' से हटकर 'नेटवर्क से कमाई' (Monetization) पर केंद्रित हो गया है। Ericsson India के मैनेजिंग डायरेक्टर नितिन बंसल के अनुसार, कंपनी अब इक्विपमेंट डिप्लॉयमेंट के बजाय 5G स्टैंडअलोन (SA) आर्किटेक्चर और AI-संचालित नेटवर्क मैनेजमेंट जैसी प्रीमियम सर्विसेज पर दांव लगा रही है।
निवेशकों के लिए बिजनेस मॉडल में बदलाव
यह बदलाव टेलीकॉम सप्लायर्स के बिजनेस मॉडल के लिए फंडामेंटल शिफ्ट है। अब तक कंपनियों की ग्रोथ टेलीकॉम ऑपरेटर्स के भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च पर टिकी थी। लेकिन अब, जब 5G रोलआउट का पहला चरण पूरा हो चुका है, सप्लायर्स के लिए सॉफ्टवेयर अपग्रेड्स और एंटरप्राइज सर्विसेज ही रेवेन्यू बनाए रखने का जरिया हैं। कंपनी भारत में अपने 2,000 से ज्यादा R&D एक्सपर्ट्स की मदद से 5G-एडवांस्ड फीचर्स और सेमीकंडक्टर डिजाइन पर काम कर रही है ताकि स्थानीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत की जा सके।
रिस्क और चुनौतियां
हालांकि, यह ट्रांजिशन अपने साथ कुछ बड़े रिस्क भी लाया है। टेलीकॉम कंपनियों ने अपने इक्विपमेंट बजट में कटौती करना शुरू कर दिया है, जिसका सीधा असर सप्लायर्स के रेवेन्यू पर दिख सकता है। इसके अलावा, घरेलू खिलाड़ियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा भी एक बड़ी चुनौती है। वहीं, 'नेटवर्क स्लाइसिंग' जैसी तकनीकों के कारण नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर रेगुलेटरी जांच का खतरा भी बना हुआ है।
आगे क्या?
निवेशकों की नजरें अब 15 अक्टूबर, 2026 पर टिकी हैं, जब कंपनी अपने तीसरी तिमाही के नतीजे जारी करेगी। बाजार यह देखेगा कि क्या सॉफ्टवेयर और AI आधारित सर्विसेज कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखने में सक्षम हैं या नहीं।
