डिजिटल पेमेंट में आई गड़बड़ी: 83% यूजर्स हर महीने झेल रहे ट्रांजैक्शन फेलियर!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
डिजिटल पेमेंट में आई गड़बड़ी: 83% यूजर्स हर महीने झेल रहे ट्रांजैक्शन फेलियर!

भारत में डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल में जहां तेज़ी आ रही है, वहीं एक सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। लोकलसर्कल्स (LocalCircles) के सर्वे के मुताबिक, 83% भारतीय डिजिटल पेमेंट यूजर्स को हर महीने ट्रांजैक्शन फेल होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यह आंकड़ा 2024 में 58% था।

क्यों हो रही हैं पेमेंट फेल?

जैसे-जैसे भारत की डिजिटल इकोनॉमी बढ़ रही है, वैसे-वैसे डिजिटल पेमेंट के इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव भी बढ़ रहा है। लोकलसर्कल्स के इस सर्वे में 52,000 से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया। इसके नतीजों से पता चला है कि अब 91% लोग फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के लिए मोबाइल डेटा पर निर्भर हैं, जबकि 2022 में यह आंकड़ा सिर्फ 62% था।

क्या है असली वजह?

सर्वे में सामने आया है कि ट्रांजैक्शन फेल होने की सबसे बड़ी वजह मोबाइल नेटवर्क की क्वालिटी है। 37% यूजर्स अपने हर महीने के 20% से ज़्यादा ट्रांजैक्शन में नेटवर्क की समस्या झेलते हैं। फिनटेक कंपनियों के लिए यह एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क है, क्योंकि लगातार आ रही गड़बड़ियों से ग्राहकों का भरोसा उठ सकता है और ट्रांजैक्शन की ग्रोथ धीमी पड़ सकती है।

ट्रांजैक्शन से भरोसे की ओर?

बाजार के जानकारों के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि अब फिनटेक सेक्टर 'यूज़र एक्विजिशन' (नए ग्राहक जोड़ने) के फेज से निकलकर 'रिलायबिलिटी' (भरोसेमंद होने) के फेज में पहुँच गया है। अब चुनौती ग्राहकों को सिर्फ पेमेंट इस्तेमाल करवाना नहीं, बल्कि एक स्मूथ और भरोसेमंद अनुभव देना है।

आगे क्या?

इंटरनेट स्पीड की समस्या और कनेक्टिविटी में बार-बार आने वाली रुकावटें सिर्फ परेशानी का सबब नहीं, बल्कि बिजनेस की एफिशिएंसी को भी नुकसान पहुंचा रही हैं। सिर्फ 7% यूजर्स फिक्स्ड-लाइन ब्रॉडबैंड या फाइबर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में, बड़ी संख्या में लोग मोबाइल नेटवर्क की अस्थिरता के शिकार हो रहे हैं।

इस समस्या को देखते हुए इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स और यूजर्स की मांग है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और टेलीकॉम रेगुलेटर्स को मिलकर यह तय करना चाहिए कि फेल हुए ट्रांजैक्शन की असली वजह क्या थी - चाहे वह बैंक सिस्टम की गलती हो, पेमेंट ऐप की दिक्कत हो, या फिर टेलीकॉम नेटवर्क की ख़राब क्वालिटी।

डिजिटल पेमेंट का भविष्य अब ऑफलाइन या कम बैंडविड्थ वाले सॉल्यूशंस पर निर्भर कर सकता है। UPI Lite का टैप-एंड-पे फीचर जैसी टेक्नोलॉजी, जो कम इंटरनेट कनेक्टिविटी में भी छोटे ट्रांजैक्शन की सुविधा देती है, ऐसे में एक अहम रोल निभा सकती है। निवेशकों को यह देखना होगा कि ये ऑफलाइन पेमेंट सॉल्यूशंस कितनी तेज़ी से अपनाए जाते हैं, क्योंकि खराब नेटवर्क वाले इलाकों में भी ट्रांजैक्शन ग्रोथ बनाए रखने के लिए यही अगले उत्प्रेरक (Catalyst) साबित हो सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.