Bharti Hexacom Share Price: Q3 में 82% उछला मुनाफा, कर्ज़ में भारी कटौती!

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AuthorMehul Desai|Published at:
Bharti Hexacom Share Price: Q3 में 82% उछला मुनाफा, कर्ज़ में भारी कटौती!
Overview

Bharti Hexacom के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है! कंपनी ने Q3 FY26 में दमदार नतीजे पेश किए हैं। नेट इनकम और EPS में **82%** का ज़बरदस्त साल-दर-साल (YoY) उछाल देखा गया है, जो क्रमशः **₹4,737 मिलियन** और **₹9.47** रहा। कंपनी का रेवेन्यू भी **4.8%** बढ़कर **₹23,598 मिलियन** हो गया, जबकि EBITDA **7.4%** बढ़कर **₹12,820 मिलियन** रहा, और मार्जिन में भी सुधार हुआ। सबसे खास बात, कंपनी ने अपने नेट डेट (Net Debt) में **29%** की बड़ी YoY कमी हासिल की है।

मुनाफे में उछाल और कर्ज़ में भारी कटौती: ये है पूरी कहानी

कंपनी के मैनेजमेंट ने Q3 FY26 (31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही) के शानदार नतीजे घोषित किए हैं। इस तिमाही में कुल रेवेन्यू ₹23,598 मिलियन रहा, जो पिछले साल की इसी तिमाही (Q3 FY25) के ₹22,507 मिलियन की तुलना में 4.8% ज़्यादा है। वहीं, पिछली तिमाही की तुलना में रेवेन्यू में 1.8% की बढ़त देखी गई। EBITDA ₹12,820 मिलियन रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 7.4% ज़्यादा है। EBITDA मार्जिन में भी 128 बेसिस पॉइंट का सुधार आया और यह 54.3% पर पहुंच गया। EBITDAaL (लीज़ लायबिलिटीज एडजस्टेड) ₹11,242 मिलियन रहा (YoY 8% की बढ़ोतरी), जिसका मार्जिन 47.6% रहा (YoY 136 bps की बढ़ोतरी)। EBIT 8.0% YoY बढ़कर ₹7,151 मिलियन रहा, और EBIT मार्जिन 30.3% रहा (YoY 88 bps की बढ़ोतरी)।

आसाधारण आइटम्स (exceptional items) से पहले नेट इनकम में 19% की YoY बढ़ोतरी होकर ₹4,318 मिलियन रही। वहीं, आसाधारण आइटम्स के बाद नेट इनकम 82% YoY उछलकर ₹4,737 मिलियन तक पहुंच गई। इस उछाल की एक खास वजह ₹419 मिलियन का नेट आसाधारण गेन (Net Exceptional Gain) रहा, जिसमें एक फेवरेबल ट्रिब्यूनल जजमेंट से मिला टैक्स क्रेडिट और कर्मचारी लाभ प्रावधानों (employee benefit provisions) का एडजस्टमेंट शामिल था। नतीजतन, प्रति शेयर आय (EPS) में 82% का जोरदार इजाफा हुआ और यह ₹9.47 दर्ज की गई।

नौ महीने का प्रदर्शन (31 दिसंबर, 2025 को समाप्त): इस अवधि में रेवेन्यू 11% YoY बढ़कर ₹69,401 मिलियन हो गया। EBITDA में 19% YoY की बढ़ोतरी के साथ ₹37,556 मिलियन रहा, और EBITDA मार्जिन 3.8 प्रतिशत पॉइंट बढ़कर 54.1% हो गया। टैक्स से पहले का मुनाफा (Profit before tax) 54% YoY बढ़कर ₹16,690 मिलियन दर्ज किया गया।

कंपनी की क्वालिटी और बैलेंस शीट: क्या खास है?

कंपनी ने अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी (operational efficiency) को मज़बूत किया है, जैसा कि तिमाही और नौ महीने की अवधि दोनों में EBITDA मार्जिन में YoY सुधार से जाहिर होता है।

कर्ज़ में बड़ी कटौती: भारती हेक्साकॉम ने अपनी बैलेंस शीट को काफी मज़बूत किया है। 31 दिसंबर, 2025 तक, कंपनी का नेट डेट (इसमें लीज़ ऑब्लिगेशन्स शामिल हैं) 29% YoY घटकर ₹56,289 मिलियन रह गया। लीज़ ऑब्लिगेशन्स को छोड़कर नेट डेट में 50% YoY की भारी कमी आई और यह ₹21,565 मिलियन हो गया। इसके चलते नेट डेट से EBITDA (वार्षिक) का अनुपात (ratio) भी काफी सुधरा है, जो पिछले साल के 1.65 गुना की तुलना में इस बार 1.10 गुना रहा।

कैश फ्लो: तिमाही के लिए ऑपरेटिंग कैश फ्लो ₹12,201 मिलियन रहा। इसी तिमाही में कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital expenditure) ₹3,403 मिलियन था, जिससे ऑपरेटिंग फ्री कैश फ्लो (EBITDA - Capex) ₹9,417 मिलियन दर्ज किया गया।

शेयरहोल्डर इक्विटी (Shareholder's Equity): इक्विटी बेस पिछले साल के ₹54,637 मिलियन से बढ़कर ₹67,183 मिलियन हो गया, जो रिटेन्ड अर्निंग्स (retained earnings) को दर्शाता है।

ऑपरेशनल मोर्चे पर क्या रहा खास?

  • कंपनी का कुल ग्राहक आधार बढ़कर 29.04 मिलियन हो गया, जो पिछले साल की तुलना में 3.7% की YoY बढ़ोतरी है।
  • मोबाइल सर्विसेज के लिए ARPU (Average Revenue Per User) बढ़कर ₹253 हो गया, जो पिछले साल ₹241 था।
  • प्रति ग्राहक मोबाइल डेटा का इस्तेमाल 22.1% YoY बढ़कर 32.0 GB प्रति माह हो गया।
  • होम्स, ऑफिस और अन्य सर्विसेज (Homes, Office and Other Services) सेगमेंट ने रेवेन्यू में 50.8% की शानदार YoY ग्रोथ दर्ज की और 73,000 नए ग्राहक जोड़े।

आगे की राह और जोखिम (Outlook & Risks)

कंपनी का मैनेजमेंट पोर्टफोलियो को प्रीमियम बनाने, क्वालिटी वाले ग्राहक जोड़ने और नेटवर्क विस्तार व टेक्नोलॉजी में लगातार निवेश करने पर ज़ोर दे रहा है। कंपनी की ग्रोथ के मुख्य कारणों में ARPU में बढ़ोतरी, मोबाइल डेटा की बढ़ती खपत और होम्स, ऑफिस और अन्य सर्विसेज सेगमेंट में विस्तार शामिल हैं।

हालांकि, कंपनी ने भविष्य के लिए कोई खास गाइडेंस (quantitative guidance) नहीं दिया है, लेकिन उसके नतीजे एक मज़बूत ऑपरेशनल और फाइनेंशियल स्थिति का संकेत देते हैं। भारतीय टेलीकॉम बाज़ार में कड़ी प्रतिस्पर्धा, बदलते रेगुलेटरी माहौल और नेटवर्क अपग्रेड में आने वाली चुनौतियाँ संभावित जोखिम हो सकती हैं। निवेशक ARPU ट्रेंड्स, सब्सक्राइबर ग्रोथ और नेटवर्क निवेश का लाभ उठाने की कंपनी की क्षमता पर बारीकी से नज़र रखेंगे।

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