Bharti Hexacom: टैक्स क्रेडिट की 'मेहरबानी'! Q3 में **81%** भागा मुनाफा, पर रेवेन्यू की रफ्तार धीमी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Bharti Hexacom: टैक्स क्रेडिट की 'मेहरबानी'! Q3 में **81%** भागा मुनाफा, पर रेवेन्यू की रफ्तार धीमी
Overview

Bharti Hexacom के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है! कंपनी ने Q3 FY26 में दमदार **81.56%** का प्रॉफिट जंप दर्ज किया है, जो **₹4,737 मिलियन** रहा। इस बंपर उछाल का बड़ा कारण एक खास टैक्स क्रेडिट था। कंपनी के रेवेन्यू में भी **4.87%** की बढ़त देखी गई।

📉 मुनाफे का एनालिसिस: कहाँ से आई तेजी?

Bharti Hexacom Limited ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही (Q3) और नौ महीनों के अपने ऑडोटेड स्टैंडअलोन फाइनेंशियल रिजल्ट्स (standalone financial results) पेश किए हैं। कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है, जिसका मुख्य श्रेय एक असाधारण टैक्स क्रेडिट (exceptional tax credit) को जाता है।

आंकड़ों पर एक नज़र:

Q3 FY26 के नतीजे:

  • ऑपरेशंस से रेवेन्यू (Revenue from operations) 4.87% बढ़कर ₹23,598 मिलियन रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही (Q3 FY25) में ₹22,507 मिलियन था।

  • इसी तिमाही में कंपनी का प्रॉफिट (Profit) 81.56% की गजब की छलांग लगाकर ₹4,737 मिलियन पर पहुंच गया, जो पिछले साल ₹2,609 मिलियन था।

  • प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) में भी 49.99% का उछाल देखा गया, जो ₹5,690 मिलियन रहा (Q3 FY25 में ₹3,793 मिलियन)।

  • बेसिक और डाइल्यूटेड अर्निंग्स पर शेयर (EPS) भी ₹5.22 से बढ़कर ₹9.47 हो गया।
9 महीनों के नतीजे (Nine Months FY26):
  • ऑपरेशंस से रेवेन्यू 10.88% बढ़कर ₹69,401 मिलियन हुआ (पिछले साल ₹62,589 मिलियन)।

  • इस अवधि में प्रॉफिट 25.50% बढ़कर ₹12,865 मिलियन पर पहुंच गया (पिछले साल ₹10,252 मिलियन)।

  • PBT 28.12% बढ़कर ₹16,599 मिलियन रहा (पिछले साल ₹12,956 मिलियन)।

  • 9 महीनों का EPS ₹20.50 से बढ़कर ₹25.73 पर आ गया।

मुनाफे की असली वजह क्या है?

Q3 FY26 में मुनाफे में आई यह भारी उछाल मुख्य रूप से ₹487 मिलियन के एक असाधारण टैक्स क्रेडिट के कारण संभव हुई। यह क्रेडिट दिल्ली इनकम टैक्स ट्रिब्यूनल (Delhi Income Tax Tribunal) के एक फेवरेबल फैसले से आया है, जिसमें स्पेक्ट्रम यूज चार्ज (spectrum usage charges) को रेवेन्यू एक्सपेंडिचर (revenue expenditure) मानने की इजाजत मिली। इस वजह से कंपनी का करंट टैक्स एक्सपेंस (current tax expense) काफी कम हो गया।

हालांकि रेवेन्यू ग्रोथ (revenue growth) मॉडरेट रही, लेकिन कंपनी को फाइनेंस कॉस्ट (finance costs) में कमी का भी फायदा मिला। Q3 FY26 में फाइनेंस कॉस्ट 18.43% घटकर ₹1,470 मिलियन रही, और 9 महीनों में यह 30.38% घटकर ₹4,520 मिलियन हो गई।

डेप्रिसिएशन और एमॉर्टाइजेशन एक्सपेंसेस (Depreciation and amortisation expenses) Q3 FY26 में 6.64% बढ़े। इसके अलावा, नई लेबर कोड्स (Labour Codes) से संबंधित ग्रैच्युटी (gratuity) और कॉम्पेंसेटेड एब्सेंस (compensated absences) के लिए ₹91 मिलियन का एक एक्सेप्शनल चार्ज (exceptional charge) भी था, जो पिछली साल की Q3 में भी इसी रकम का था।

बैलेंस शीट का हाल:

31 दिसंबर, 2025 तक, कंपनी की टोटल एसेट्स (Total assets) में ₹192,031 मिलियन पर मामूली YoY बढ़त देखी गई। वहीं, टोटल लायबिलिटीज (Total liabilities) ₹124,848 मिलियन पर काफी कम हो गईं, जिसका मुख्य कारण अनएलोकेटेड लायबिलिटीज (unallocated liabilities), जिसमें बॉरोइंग्स (borrowings) शामिल हैं, में कमी है।

सेगमेंट के अनुसार परफॉरमेंस:

Q3 FY26 में, मोबाइल सर्विसेज (Mobile Services) से ₹22,718 मिलियन का रेवेन्यू आया, जबकि होम्स, ऑफिस और अन्य सर्विसेज (Homes, Office and Other Services) से ₹972 मिलियन मिले। मोबाइल सर्विसेज के लिए प्रॉफिट बिफोर टैक्स, फाइनेंस कॉस्ट, एक्सेप्शनल आइटम्स, और टैक्स ₹7,151 मिलियन रहा, जबकि अन्य सर्विसेज से ₹2 मिलियन का योगदान रहा।

🚩 जोखिम और भविष्य का नज़रिया:

कंपनी ने अपने फाइनेंशियल अपडेट में भविष्य की ग्रोथ, आउटलुक (outlook) या किसी खास रिस्क (specific risks) को लेकर कोई फॉरवर्ड-लुकिंग गाइडेंस (forward-looking guidance) या मैनेजमेंट कमेंट्री (management commentary) नहीं दी है। इस जानकारी की कमी के चलते, निवेशकों के लिए कंपनी की स्ट्रैटेजिक दिशा (strategic direction) और भविष्य के परफॉरमेंस को लेकर उतनी स्पष्टता नहीं मिल पा रही है, खासकर एक्सेप्शनल आइटम्स के प्रभाव के बिना प्रॉफिट ग्रोथ की स्थिरता पर सवाल बने हुए हैं।

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